सांप्रदायिक सौहार्द और प्रशासनिक सहयोग की मिसाल: इस बार वाहनों से पिरान कलियर पहुंचेगा बरेली का ऐतिहासिक झंडा मुबारक।

Aug 7, 2026 - 14:18
Aug 7, 2026 - 14:22
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सांप्रदायिक सौहार्द और प्रशासनिक सहयोग की मिसाल: इस बार वाहनों से पिरान कलियर पहुंचेगा बरेली का ऐतिहासिक झंडा मुबारक।

सांप्रदायिक सौहार्द और प्रशासनिक सहयोग की मिसाल: इस बार वाहनों से पिरान कलियर पहुंचेगा बरेली का ऐतिहासिक झंडा मुबारक।

नई दस्तक (मुनव्वर अली साबरी)
758वें सालाना उर्स की तैयारियां तेज, 13 अगस्त को होगी झंडा कुशाई, लाखों जायरीनों के स्वागत की तैयारियां शुरू


पिरान कलियर/रुड़की। विश्वप्रसिद्ध दरगाह हज़रत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स मुबारक को लेकर तैयारियां तेज़ हो गई हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी बरेली से निकलने वाला ऐतिहासिक 38वां साबरी झंडा मुबारक पूरी अकीदत और धार्मिक उत्साह के साथ पिरान कलियर पहुंचेगा। हालांकि इस वर्ष श्रद्धालुओं की सुविधा, कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़े हुए यातायात दबाव और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए झंडा मुबारक के साथ आने वाला अकीदतमंदों का काफिला पैदल यात्रा के बजाय वाहनों के माध्यम से दरगाह शरीफ पहुंचेगा।
दरगाह साबिर पाक के सज्जादानशीन शाह अली एजाज़ कुद्दुसी साबरी की अनुमति से साहिबज़ादा शाह यावर एजाज़ की सरपरस्ती में यह निर्णय लिया गया है। आयोजकों का कहना है कि यह फैसला किसी परंपरा में बदलाव नहीं, बल्कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।


जानकारी के अनुसार, बरेली से रवाना होने वाला झंडा मुबारक वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। हर साल हजारों अकीदतमंद झंडे के साथ कलियर शरीफ पहुंचते हैं और दरगाह शरीफ़ के मुख्य द्वार पर झंडा पेश कर उर्स की पहली रस्म झंडा कुशाई अदा की जाती है। इस धार्मिक आयोजन में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में जायरीन शामिल होते हैं।

साहिबज़ादा शाह यावर एजाज़ ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर भारी भीड़ रहती है। ऐसे में प्रशासन को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा दोनों धार्मिक आयोजनों का संचालन शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में हो सके, इसलिए इस वर्ष वाहनों से पिरान कलियर पहुंचने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि दरगाह साबिर पाक हमेशा से भाईचारे, अमन और इंसानियत का संदेश देती आई है और यह निर्णय भी उसी भावना को मजबूत करने वाला है।
उन्होंने बताया कि 13 अगस्त को पिरान कलियर स्थित दरगाह साबिर पाक के मुख्य द्वार पर झंडा कुशाई की रस्म अदा की जाएगी। इसके बाद चांद दिखाई देने पर मेहंदी डोरी की रस्म के साथ 758वें सालाना उर्स मुबारक का विधिवत आगाज़ होगा। उर्स के दौरान दरगाह परिसर में विभिन्न धार्मिक रस्में, दुआएं और जायरीनों की बड़ी आमद रहेगी।


उधर उर्स को लेकर दरगाह प्रबंधन और प्रशासन भी तैयारियों में जुट गया है। सुरक्षा, ट्रैफिक, पेयजल, सफाई, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं, ताकि देश-विदेश से आने वाले लाखों जायरीनों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
दरगाह प्रबंधन ने सभी अकीदतमंदों से अपील की है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, अनुशासन बनाए रखें और उर्स के दौरान अमन, भाईचारे तथा गंगा-जमुनी तहज़ीब की परंपरा को और अधिक मजबूत बनाने में अपना सहयोग दें। इस वर्ष का झंडा मुबारक भी आपसी प्रेम, धार्मिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश लेकर पिरान कलियर पहुंचेगा।

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