उत्तर प्रदेश पुलिस ने आदेश मान ने से किया इनकार संभल हिंसा मामले में अब एक बड़ा संवैधानिक और प्रशासनिक टकराव
मुनव्वर अली
Sambhal
#COAnujChaudhru
संभल हिंसा मामले में अब एक बड़ा संवैधानिक और प्रशासनिक टकराव देखने को मिल रहा है एक तरफ़ कोर्ट का आदेश है तो दूसरी तरफ़ कोर्ट की दलील संभल की सीजेएम कोर्ट ने हिंसा के दौरान हुई फ़ायरिंग को लेकर चर्चित पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी समित पुलिस वालों पर एफ़आईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं लेकिन संभल के एसएसपी ने इस आदेश को मान ने से साफ़ इनकार कर दिया है।इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि किया अब कोर्ट और पुलिस के बीच तनाव की स्तिथि उत्पन्न होगी मामला 24 नवंबर 2024 का है जब संभल में शाही इमाम मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी इस दौरान खग्गू सराये के रहने वाले आलम नामक युवक को गोली लगी थी इस मामले में सुनवाई करते हुए सीजेएम कोर्ट ने तत्कालीन सीओ और वर्तमान में फिरोजाबाद में तैनात एएसपी अनुज चौधरी एसएचओ अनुज तोमर पंद्रह से बीस अन्य पुलिस कर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था लेकिन कोर्ट के इस आदेश के बाद संभल के एसएसपी कृष्ण कुमार विश्नोई अपने अधिकारियों के लिए ढाल बन कर खड़े हो गये हैं।एसएसपी ने साफ़ कह दिया है कि पुलिस वालों पर मुक़दमा दर्ज नहीं होगा उन्होंने इसके पीछे दो बड़े तर्क दिए हैं कि हिंसा में घायलों को जो गोली लगी थी वह 32 बोर की थी और पुलिस 32 बोर का प्रयोग नहीं करती पोस्ट मार्टम और बैलेस्टिक रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हो चुकी है सरकार द्वारा गठित नायायिक आयोग अपनी जांच कर कैबिनेट को अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है।जिस में पुलिस एक्शन को सही माना गया है एसएसपी ने कोर्ट के आदेश पर कहा है की वह इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे।
इस संबंध में संभल से समाजवादी पार्टी संसद ज़ियाउर रहमान बर्क का कहना है कि क़ानून से ऊपर कोई नहीं ना वर्दी ना ओहदा संभल हिंसा के दौरान एक युवक को गोली मारने के मामले में तत्कालीन सीओ समित अन्य पुलिस कर्मियों पर एफ़आईआर दर्ज करने का सीजेएम कोर्ट का एक ऐतिहासिक फैसला है यह आदेश साफ़ संदेश देता है अफ़सर हो या आम नागरिक क़ानून तोड़ने वाला बच नहीं सकता सपा संसद ने कोर्ट के आदेश का समर्थन किया है।सपा संसद का यह बयान सोशल मीडिया X पर आया है।
किया है पूरा मामला संभल में मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान 24 नवंबर 2024 को भड़की हिंसा में चार युवकों की मौत हो हुई थी जबकि कई पुलिस कर्मी प्रशासनिक अधिकारी भी घायल हुए थे नख़ासा क्षेत्र के खग्गू सराये निवासी आलम भी उस दिन गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुआ था आलम के पिता की और से दायर की गई याचिका में दावा किया गया आलम उस दिन बेकरी प्रोडक्ट बेचने के लिए निकला था परिजनों के मुताबिक गिरफ्तारी के डर से गुपचुप तरीके से उसका निजी अस्पताल में इलाज कराया गया था चार फरवरी 2025 को सीजेएम कोर्ट में न्याय की गुहार लगाते हुये याचिका दायर की गई जनवरी 2026 को मामले की और से अंतिम सुनवाई हुई और मंगलवार को मामले में आदेश दिया गया इस में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी सम्भल कौतवाल अनुज तोमर सहित 20 पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया मुख्य नायायिक मजिस्ट्रेट ने सभी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिये इसके बाद संभल के एसएसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने कहा कि सरकार द्वारा गठित नायायिक आयोग ने जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को सौंप चुका है जो कैबिनेट में पेश हो चुकी है गोली लगने से घायल युवक के मामले में मुकदमा दर्ज नहीं करेंगे और कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे।
लेकिन यहाँ बड़ा सवाल यह है की किया उत्तर प्रदेश में पुलिस और कोर्ट के बीच तनाव की स्तिथि पैदा होगी आम तौर पर कोर्ट के आदेश का पालन करना पुलिस की बाध्यता होती है लेकिन संभल पुलिस का कहना है कि जब न्यायिक आयोग की रिपोर्ट आ चुकी है तो यह आदेश माननय नहीं होना चाहिये अब देखना होगा जब पुलिस हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाती है तो वहाँ से किया फ़ैसला आता है किया अनुज चौधरी पर एफ़आईआर होगी या पुलिस उन्हें अपनी दलीलों से उन्हें बचा ले जायेगी।
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