सज्जादा नशीन शाह अली ऐजाज़ कुद्दुसी साबरी की इजाज़त से साहिबज़ादा शाह यावर ऐजाज़ की सरपरस्ती में निकला ऐतिहासिक परचम जुलूस, हजारों अकीदतमंद हुए शामिल
सज्जादा नशीन शाह अली ऐजाज़ कुद्दुसी साबरी की इजाज़त से साहिबज़ादा शाह यावर ऐजाज़ की सरपरस्ती में निकला ऐतिहासिक परचम जुलूस, हजारों अकीदतमंद हुए शामिल
नई दस्तक : (मुनव्वर अली साबरीं)
बरेली: विश्वप्रसिद्ध दरगाह हज़रत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स मुबारक की तैयारियों के बीच बुधवार को एक बार फिर आस्था, मोहब्बत और अकीदत का अद्भुत नज़ारा देखने को मिला। दरगाह साबिर पाक के सज्जादा नशीन हज़रत शाह अली ऐजाज़ कुद्दुसी साबरी की इजाज़त से बरेली से पिरान कलियर शरीफ के लिए 38वां साबरी परचम पूरे धार्मिक उत्साह के साथ रवाना किया गया।
इस ऐतिहासिक परचम यात्रा का नेतृत्व साहिबज़ादा शाह यावर ऐजाज़ ने किया। परचम रवाना होने से पहले विशेष दुआएं की गईं और उर्स मुबारक की कामयाबी, मुल्क में अमन-चैन तथा भाईचारे की दुआ मांगी गई।
इसके बाद मस्जिद मेहला से परचम जुलूस का शुभारंभ हुआ। हजारों अकीदतमंदों ने हाथों में परचम थामे और "हक़ साबिर... या साबिर" के गगनभेदी नारों के साथ पूरे जोश और अकीदत से जुलूस में शिरकत की। यह विशाल जुलूस विभिन्न मार्गों से होते हुए रज़ा कॉलोनी पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने परचम का स्वागत किया और जुलूस पर फूल बरसाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
रज़ा कॉलोनी से करीब 150 अकीदतमंदों का पैदल जत्था परचम लेकर पिरान कलियर शरीफ के लिए रवाना हुआ। यह जत्था लगभग 10 दिनों की पदयात्रा पूरी करते हुए पिरान कलियर पहुंचेगा। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों और जायरीन द्वारा जत्थे का स्वागत किया जाएगा तथा लंगर और विश्राम की व्यवस्थाएं भी की जाएंगी।
पिरान कलियर पहुंचने पर सज्जादा नशीन शाह अली ऐजाज़ कुद्दुसी साबरी स्वयं परचम यात्रा में शामिल अकीदतमंदों का इस्तकबाल (खैर-मकदम) करेंगे। इसके उपरांत बाद नमाज़-ए-असर सज्जादा नशीन की सरपरस्ती तथा हजारों जायरीन और अकीदतमंदों की मौजूदगी में बरेली से पदयात्रा कर लाया गया यह पवित्र परचम दरगाह साबिर पाक के मुख्य द्वार पर पूरी अकीदत के साथ पेश किया जाएगा।
धार्मिक परंपरा के अनुसार हर वर्ष बरेली से परचम पदयात्रा निकालकर पिरान कलियर लाया जाता है। इस वर्ष निकाला गया यह 38वां ऐतिहासिक परचम है, जो वर्षों पुरानी सूफी परंपरा और साबरी सिलसिले की अटूट आस्था का प्रतीक माना जाता है।
यह संपूर्ण पदयात्रा वसीम साबरी और कमाल साबरी की सदारत (नेतृत्व) में संपन्न हो रही है। दोनों की देखरेख में जत्था अनुशासन और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए पिरान कलियर पहुंचेगा, जहां उर्स मुबारक के शुभ अवसर पर परचम पेश करने की रस्म अदा की जाएगी।
हर वर्ष की तरह इस बार भी परचम यात्रा को लेकर अकीदतमंदों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। माना जाता है कि इस पवित्र पदयात्रा में शामिल होकर परचम को दरगाह साबिर पाक तक पहुंचाना बड़े सौभाग्य और रूहानी बरकत का कार्य है। यही कारण है कि दूर-दराज़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर सूफी परंपरा, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देते हैं।
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