सावधान ! जंतर-मंतर में धरने पर बैठे सोनम वांगचुक की हालत बिगड़ रही है सरकार सोनम की हड़ताल खत्म कराए, क्योंकि कोई ऊंच-नीच हो गई तो हालात को संभालना मुश्किल हो जाएगा डा. अनिता राठौर

Jul 14, 2026 - 16:16
Jul 14, 2026 - 16:22
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सावधान ! जंतर-मंतर में धरने पर बैठे सोनम वांगचुक की हालत बिगड़ रही है  सरकार सोनम की हड़ताल खत्म कराए, क्योंकि कोई ऊंच-नीच हो गई तो हालात को संभालना मुश्किल हो जाएगा  डा. अनिता राठौर

सावधान ! जंतर-मंतर में धरने पर बैठे सोनम वांगचुक की हालत बिगड़ रही है

सरकार सोनम की हड़ताल खत्म कराए, क्योंकि कोई ऊंच-नीच हो गई तो हालात को संभालना मुश्किल हो जाएगा

डा. अनिता राठौर

शिक्षाविद् व पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की तबियत निरंतर बिगड़ती जा रही है। वह जंतर-मंतर, नई दिल्ली, पर पिछले 13 दिन से अनिश्चित भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की मांगों के समर्थन में, जिनमें से प्रमुख यह है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान अपने पद से इस्तीफ़ा दें, क्योंकि प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताओं की नियमित शिकायतें आ रही हैं और पेपर लीक हो रहे हैं, जिससे छात्रों व उनके परिवारों का जीवन कठिनाई में आ गया है। हाल के दिनों में 20-22 छात्रों ने आत्महत्या भी की है।

सोनम वांगचुक की जो नवीनतम डॉक्टरी जांच (8 जुलाई 2026) को हुई यानी उनकी भूख हड़ताल के 11वें दिन, उसमें मालूम हुआ कि भूख हड़ताल आरंभ होने के बाद उनका वजन 7 किलो कम होकर 59.40 किलो रह गया है, बैठे हुए उनका ब्लड प्रेशर 103/68 एमएमएचजी था और लेटे रहने पर 111/73 एमएम एचजी, जोकि सामान्य 120/80 एमएम एचजी से काफी कम है। उनकी हृदय गति 74 बीट्स प्रति मिनट रिकॉर्ड की

गई और ऑक्सीजन सेचुरेशन 98 प्रतिशत था। उनके मेडिकल बुलेटिन में कहा गया है कि उनका हाइड्रेशन उचित है और मानसिक रूप से वह सतर्क हैं। लेकिन 8 जुलाई 2026 के बाद उनके स्वास्थ्य में निरंतर गिरावट आती जा रही है, विशेषकर इसलिए भी कि दिल्ली में भारी वर्षा जारी है और जंतर-मंतर पर मौसम की मार से बचने के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं है, जिसके लिए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को पुलिस के पैरों में गिरते हुए देखा गया कि मौसम की मार से बचने के लिए उन्हें कुछ व्यवस्था करने की अनुमति दे दी जाए। लेकिन प्रशासन कुछ सुनने के लिए तैयार नहीं है। अगर इस संवेदनहीनता से सोनम वांगचुक को कुछ हो जाता है, जिसकी आशंका प्रबल है, तो स्थिति को नियंत्रित करना कठिन हो जाएगा, विशेषकर लद्दाख में। इस बीच सीजेपी ने घोषणा की है कि वह 20 जुलाई 2026 को संसद मार्च करेगी और उसने छात्रों व पैरेंट्स से इस मार्च में शामिल होने का आग्रह किया है।

आगे बढ़ने से पहले यह बताना आवश्यक है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2026 को सीजेपी का मूल एक्स हैंडल पुनः स्थापित करनेका आदेश दिया है, जिसे मई 2026 में रोक लिया गया था। अभिजीत दीपके ने इस आदेश को अपने आंदोलन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व डिजिटल अधिकारों के लिए बड़ी जीत बताया है। वैसे अब सीजेपी को अन्य समाज सेवी संगठनों का समर्थन भी मिलने लगा है। मसलन, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) का एक प्रतिनिधि दल सीजेपी के आंदोलनस्थल पर पहुंचा और उसने सीजेपी की मांगों का समर्थन किया। सीजेपी का आंदोलन 20 जून 2026 से चल रहा है, यह मांग करते हुए कि धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफ़ा हो, नैशनल टैस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को भंग किया जाए। जिन छात्रों

ने आत्महत्या की है, उनके परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और जो लोग परीक्षाओं में अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए।

आंदोलनस्थल पर, लेकिन एक अलग मंच पर, इन्हीं मांगों को लेकर सीपीआई (एमएल) लिबरेशन अफ्फिलेटिड आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) के छात्र नेहा, मनीष, हृषिकेश, दीपक कुमार वर्मा और आमीन भी अपनी अनिश्चित भूख हड़ताल जारी रखे हुए हैं। गौरतलब है कि मैडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए 3 मई 2026 की नीट-यूजी परीक्षा को पेपर लीक के कारण रद्द करना पड़ा था, जिसे बाद में 21 जून 2026 को फिर से आयोजित किया गया। इसके बाद सीबीएसई की परीक्षा कापियों में गड़बड़ी का मामला प्रकाश में आया और फिर महाराष्ट्र में टेट परीक्षा विवाद भी हुआ। अब एनटीए फिर से विवाद के घेरे में आ गया है कि यूजीसी नेट जून 2026 की जो परीक्षा हुई थी, उसमें पेपर लीक के मामले सामने आ रहे हैं। इस पेपर के लीक होने की खबरों से पहले नेट के पेपर जबरदस्त गलतियां और टाइपिंग मिस्टेक प्रकाश में आ चुकी थीं। शिक्षा मंत्रालय ने एनटीए से कहा है किइन आरोपों की तह तक पहुंचा जाए में

कि 100 पेज का पीडीएफ, जिसका संबंध यूजीसी नेट के समाजशास्त्र के पेपर से था, को परीक्षा से पहले सर्कुलेट किया गया, जिसमें लगभग 90 प्रश्न वास्तविक पेपर से मिलते हुए थे। यह विवाद उस समय तूल ले गया जब

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इन अनियमितताओं को लेकर सरकार की आलोचना की। एक मीडिया रिपोर्ट को एक्स पर साझा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पेपर सेटिंग से संबंधित पीडीएफ, जोकि सिर्फ एनटीए के पास होना चाहिए था, परीक्षा से पहले ही सामने आ गई। उन्होंने लिखा, "गंभीर आरोप जो पिछले सप्ताह के यूजीसी नेट परीक्षा से संबंधित सामने आए हैं, बहुत चौंका देने वाले हैं। कुछ सप्ताह पहले नीट पेपर लीक हुआ था, अब खबरें आ रही हैं कि 100 पेज का पीडीएफ यूजीसी नेट परीक्षा पहले ही सर्कुलेट कर रहा है।" उन्होंने आरोप लगाया कि प्रश्नपत्र बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली व राजस्थान में 2.25 लाख रुपये में बेचा जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि वही नैटवर्क आगामी परीक्षाओं जैसे सीएसआईआर-नैट, एचटीईटी और एडीए के पेपर उपलब्ध कराने का ऑफर दे रहा है। नवीनतम आरोप ऐसे समय में आए हैं जब एनटीए की विश्वसनीयता पहले से वह भी से

ही जबरदस्त दबाव में है। नीट-यूजी पेपर लीक से जबरदस्तराजनीतिक तूफान खड़ा हो गया था और सरकार को मजबूरन वायदा करना पड़ा था कि हाई-स्टेक परीक्षाओं में कड़े सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। लेकिन ये वायदे भी चुनावी वायदे जैसे ही प्रतीत हो रहे हैं, जैसा कि बाद के घटनाक्रम से जाहिर हो रहा है। यूजीसी नेट के समाजशास्त्र के पेपर में न सिर्फई-मेल की त्रुटियां थीं बल्कि मुख्य विचारकों के नाम गलत थे और हिंदी अनुवाद निम्नस्तरीय था, जिससे मालूम होता है कि पेपर को तैयार करने में लापरवाही बरती गई। फिर इसका पीडीएफ परीक्षा से पहले ही लीक होने की बात सामने आई। यूजीसी-नेट का आयोजन एनटीए ही करता है, यह तय करने के लिए कि सहायक प्रोफेसर, जूनियर रिसर्च फेलोशिप और पीएचडी प्रोग्राम के लिए कौन योग्य है।

बहरहाल, जिस तरह से एक के बाद एक मामले प्रकाश में आ रहे हैं, उससे लगता है कि एनटीए में स्थितियां ठीक नहीं हैं, प्रबंधतंत्र अपना नियंत्रण खो बैठा है और कोई भी जवाबदेही के लिए तैयार नहीं है। सरकार को लगता है कि अगर वह धर्मेन्द्र प्रधान से इस्तीफा ले लेगी तो यह उसकी 'हार' होगी। बात हार जीत की है ही नहीं बल्कि पदों पर योग्य व्यक्तियों को नियुक्त करने की है। लोकतंत्र का यही तकाजा है कि अयोग्य व्यक्तियों को हटाया जाए और उनके स्थान पर योग्य व्यक्तियों को लाया जाए। सोनम वांगचुक व सीजेपी इसी के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन उनकी बात सुनने को कोई तैयार ही नहीं है। सरकार को चाहिए कि इस संदर्भ में संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत उचित निर्णय ले, सोनम वांगचुक की हड़ताल खत्म कराए, क्योंकि अगर कोई ऊंच-नीच हो गई तो हालात को संभालना बहुत मुश्किल हो जाएगा, विशेषकर लद्दाख में।

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