विश्व प्रसिद्ध दरगाह में गुंडागर्दी का 'लाइव नजारा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल...

Aug 2, 2026 - 21:51
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विश्व प्रसिद्ध दरगाह में गुंडागर्दी का 'लाइव नजारा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल...

नई दस्तक:(मुनव्वर अली साबरीं)

पिरान कलियर। "जब रखवाले ही नज़र न आएं, तो शरारती तत्वों के हौसले बुलंद होना लाज़िमी है।" विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक में इन दिनों सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। लाखों जायरीनों की आस्था के इस मुकाम पर आए दिन असामाजिक तत्वों की हरकतें सामने आ रही हैं। कभी जायरीनों से अभद्रता, कभी आपसी मारपीट तो कभी सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो, दरगाह क्षेत्र की व्यवस्थाओं की हकीकत बयां कर रहे हैं। ताजा मामला भी ऐसा ही है, जिसने जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दरगाह शरीफ के पैताने पर बनी सीढ़ियों के बाहर दो गुट आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। देखते ही देखते कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई और दोनों पक्षों के बीच लाठी-डंडे चलने लगे। अचानक हुई इस मारपीट से आसपास मौजूद जायरीनों में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद लोग अपनी सुरक्षा के लिए इधर-उधर भागते नजर आए, जबकि कुछ लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराने का प्रयास किया।

दरगाह की व्यवस्थाएं जिला प्रशासन के अधीन संचालित होती हैं। यहां व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए प्रबंधक, सुपरवाइजर, कर्मचारी और पीआरडी जवानों की तैनाती की गई है। इसके बावजूद समय-समय पर सामने आने वाली घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी है। आए दिन वायरल हो रहे वीडियो यह संकेत दे रहे हैं कि असामाजिक तत्वों में कार्रवाई का भय लगातार कम होता जा रहा है।

जिस स्थान पर यह घटना हुई, वहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और दूर-दराज से आए जायरीन बैठकर विश्राम करते हैं। ऐसे संवेदनशील स्थान पर खुलेआम लाठी-डंडों से मारपीट होना किसी भी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकता था। यदि झगड़े की चपेट में कोई मासूम, महिला या बुजुर्ग आ जाता, तो हालात कहीं अधिक गंभीर हो सकते थे।

गौर करने वाली बात यह भी है कि इसी स्थान पर पहले भी मामूली विवाद ने हत्या जैसी संगीन वारदात का रूप ले लिया था। इसके बावजूद यदि असामाजिक तत्व उसी जगह बेखौफ होकर कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं, तो यह सुरक्षा इंतजामों की गंभीर खामी की ओर इशारा करता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दरगाह क्षेत्र में बार-बार सामने आने वाली ऐसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश कब लगेगा? आस्था के इस विश्व प्रसिद्ध केंद्र पर यदि जायरीन खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे, तो व्यवस्थाओं पर उठ रहे सवाल और भी गहरे होते जाएंगे।

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