पीलीभीत की साबरी खानकाह से फैल रही इल्म और इंसानियत की रोशनी, डॉ. बिलाल हसन चिश्ती की अनोखी पहल

Aug 15, 2026 - 10:20
Aug 15, 2026 - 10:48
 0
पीलीभीत की साबरी खानकाह से फैल रही इल्म और इंसानियत की रोशनी, डॉ. बिलाल हसन चिश्ती की अनोखी पहल

पीलीभीत की साबरी खानकाह से फैल रही इल्म और इंसानियत की रोशनी, डॉ. बिलाल हसन चिश्ती की अनोखी पहल

शिक्षा को खिदमत का जरिया बनाकर जरूरतमंद बच्चों के भविष्य को संवार रही खानकाह, मदरसे के बच्चों का पूरा खर्च भी उठाती है खानकाह

नई दस्तक:- (मुनव्वर अली साबरीं) 15 अगस्त पर विशेष

पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत शहर के मोहल्ला भूरे खां, कचहरी रोड स्थित हजरत सय्यद अनवर अली शाह साहब की दरगाह शरीफ रूहानियत, इल्म और इंसानियत की खिदमत का एक बड़ा मरकज बनती जा रही है। पीलीभीत में यह खानकाह “साबरी बाग” के नाम से भी जानी जाती है और इसे साबरी सिलसिले की पीलीभीत की प्रमुख और बड़ी खानकाह के रूप में जाना जाता है।

हजरत सय्यद अनवर अली शाह साहब साबरी सिलसिले के बुजुर्गों में एक अहम मुकाम रखते हैं। पीलीभीत की यह खानकाह पिरान कलियर शरीफ स्थित दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक रह. से मंसूब है। इसी रूहानी सिलसिले की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए खानकाह के सज्जादानशीन जनाब डॉ. बिलाल हसन चिश्ती शिक्षा और इंसानी खिदमत के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रयास कर रहे हैं।

डॉ. बिलाल हसन चिश्ती ने शिक्षा को आम करने और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के उद्देश्य से दरगाह शरीफ परिसर में जाम-ए-अनवर स्कूल का निर्माण कराया है। यहां बच्चों को बेहद कम फीस में शिक्षा प्रदान की जाती है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी बेहतर शिक्षा हासिल कर सकें।

स्कूल के साथ लैंग्वेज लैब और रिसर्च सेंटर भी स्थापित किया गया है। यहां गरीब और जरूरतमंद बच्चियों को भाषाओं का ज्ञान हासिल करने का अवसर दिया जाता है, जिससे वे शिक्षा के साथ अपने भविष्य के लिए नए अवसरों की ओर कदम बढ़ा सकें।

जरूरतमंद बच्चों के लिए शिक्षा पूरी तरह मुफ्त

खानकाह की ओर से जरूरतमंद बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। शहर की मस्जिदों के इमामों के बच्चों को स्कूल में मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाती है। वहीं यतीम बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ ड्रेस और किताबें भी मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं।

जिन बच्चियों के माता-पिता उनकी पढ़ाई का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें भी शिक्षा, ड्रेस और किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। जरूरतमंद छात्राओं की आवश्यकता के अनुसार अगर कोई लड़की बुर्का या नकाब की मांग करती है तो खानकाह जाम-ए-अनवर की ओर से उसे भी मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है।

मदरसे के बच्चों का पूरा खर्च उठाती है खानकाह

दरगाह शरीफ परिसर में एक मदरसा भी संचालित किया जा रहा है, जहां बच्चे रहकर दीनी तालीम हासिल कर रहे हैं। इन बच्चों की शिक्षा, रहने और भोजन से संबंधित पूरा खर्च खानकाह की ओर से उठाया जाता है।

मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों से किसी भी तरह की कोई फीस नहीं ली जाती। यहां रहने वाले बच्चों के दोनों समय के खाने की व्यवस्था भी खानकाह की ओर से ही की जाती है। यानी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले बच्चों को दीनी शिक्षा हासिल करने के लिए किसी तरह का आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ता।

मदरसे की इसी व्यवस्था के माध्यम से अब तक सैकड़ों बच्चे हिफ्ज-ए-कुरआन की शिक्षा पूरी कर हाफिज-ए-कुरआन बनकर फारिग हो चुके हैं। धार्मिक शिक्षा के साथ बच्चों की जरूरतों का ख्याल रखना खानकाह की इस सेवा को और भी महत्वपूर्ण बनाता है।

बिना चंदे के चल रही शिक्षा की खिदमत

खास बात यह है कि खानकाह में संचालित स्कूल और मदरसे के लिए किसी तरह का चंदा नहीं लिया जाता। शिक्षा और जरूरतमंद बच्चों की सहायता को खानकाह की ओर से खिदमत का हिस्सा माना गया है।

दरगाह शरीफ के सज्जादानशीन डॉ. बिलाल हसन चिश्ती, जो पीएचडी धारक हैं, का कहना है कि उनका उद्देश्य शिक्षा को आम और आसान बनाना है। उनका मानना है कि **शिक्षा हर बच्चे और बच्ची का हक है और कोई भी बच्चा सिर्फ पैसे के अभाव में शिक्षा से महरूम नहीं रहना चाहिए।**धार्मिक शिक्षा के साथ बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का यह प्रयास भी खानकाह की शैक्षिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उनकी कोशिश है कि जो बच्चा शिक्षा हासिल करना चाहता है, उसके रास्ते में आर्थिक मजबूरी रुकावट न बने। इसी सोच के तहत स्कूल, लैंग्वेज लैब, रिसर्च सेंटर और मदरसे के माध्यम से अलग-अलग जरूरतों के मुताबिक बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

रूहानी मरकज से सामाजिक बदलाव की कोशिश

पीलीभीत की साबरी बाग खानकाह आज रूहानी तालीम के साथ-साथ शिक्षा, इंसानियत और सामाजिक सेवा की एक ऐसी मिसाल पेश कर रही है, जहां जरूरतमंद बच्चों के हाथों में किताबें पहुंचाने और उनके भविष्य को संवारने का प्रयास किया जा रहा है।

एक ओर खानकाह हजरत सय्यद अनवर अली शाह साहब के रूहानी मिशन और साबरी सिलसिले की परंपरा से जुड़ी हुई है, तो दूसरी ओर शिक्षा के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

रूहानी मरकज से इल्म की यह रोशनी उन घरों तक पहुंचाने का प्रयास है, जहां आर्थिक मजबूरियों के कारण बच्चों के सपने अधूरे रह जाते हैं। यही इस खानकाह की शिक्षा-खिदमत को एक अलग और प्रेरणादायक पहचान देता है।

— नई दस्तक

What's Your Reaction?

Like Like 1
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0