साबिर पाक के 758वें उर्स का रूहानी आगाज़, हजारों अकीदतमंदों की मौजूदगी में अदा हुई रस्म-ए-मेहंदी डोरी

Aug 15, 2026 - 06:54
Aug 15, 2026 - 07:05
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साबिर पाक के 758वें उर्स का रूहानी आगाज़, हजारों अकीदतमंदों की मौजूदगी में अदा हुई रस्म-ए-मेहंदी डोरी

नई दस्तक:-(मुनव्वर अली साबरीं)

रबीउल अव्वल का चांद दिखाई देते ही सज्जादा नशीन शाह अली ऐजाज़ कुद्दूसी साबरी की अगुवाई में निकला विशाल जुलूस, कदीमी घर से दरगाह तक गूंजती रहीं “अल्लाहू” की सदाएं — मेहंदी संदल पेश करने के बाद हुआ कुल शरीफ, अमन-ओ-अमान की दुआ और महफिल-ए-समा में निजाम साबरी के सूफियाना कलामों पर झूमे अकीदतमंद

पिरान कलियर। रबीउल अव्वल का चांद दिखाई देते ही विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक में 758वें सालाना उर्स मुबारक का रूहानी आगाज़ रस्म-ए-मेहंदी डोरी के साथ हुआ। सज्जादा नशीन शाह अली ऐजाज़ कुद्दूसी साबरी ने हजारों अकीदतमंदों की मौजूदगी में मेहंदी डोरी की रस्म अदा की। रस्म के दौरान पूरा पिरान कलियर सूफियाना रंग, अल्लाह की सदाओं और अकीदतमंदों की भीड़ से रूहानी कैफियत में डूबा नजर आया।

रस्म-ए-मेहंदी डोरी के लिए सज्जादा नशीन शाह अली ऐजाज़ कुद्दूसी साबरी अपने आवास से हजारों अकीदतमंदों के विशाल जुलूस के साथ अपने कदीमी घर के लिए रवाना हुए। जुलूस में सूफी हजरात “अल्लाहू” की सदाएं बुलंद करते हुए आगे बढ़ रहे थे, वहीं दूर-दराज से पहुंचे जायरीन और अकीदतमंद भी अल्लाह की सदाओं के साथ जुलूस में शामिल होकर अपनी अकीदत का इज़हार कर रहे थे।

जैसे-जैसे जुलूस कदीमी घर की ओर बढ़ता गया, पिरान कलियर की गलियां अकीदतमंदों से भरती चली गईं। जगह-जगह लोगों ने सज्जादा नशीन का दीदार किया और अपनी अकीदत पेश की। कदीमी घर पहुंचने पर खालिक मियां ने सज्जादा नशीन शाह अली ऐजाज़ कुद्दूसी साबरी का गर्मजोशी के साथ खैरमकदम किया।

इसके बाद कदीमी घर से मेहंदी डोरी का संदल लेकर सज्जादा नशीन जब दरगाह साबिर पाक की ओर रवाना हुए तो जुलूस का नजारा और भी रूहानी हो गया। कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश करना शुरू किया। कलाम की गूंज के बीच सूफी हजरात झूमते हुए आगे बढ़ते रहे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा पिरान कलियर साबिर पाक की अकीदत और मोहब्बत में सराबोर हो गया हो।

जुलूस के दरगाह साबिर पाक की ओर बढ़ने के साथ ही रास्ते में अकीदतमंदों की भीड़ बढ़ती चली गई। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे जायरीन ने जुलूस का हिस्सा बनकर अपनी अकीदत पेश की। करीब दो घंटे की पदयात्रा के बाद मेहंदी डोरी का यह रूहानी जुलूस दरगाह साबिर पाक पहुंचा।

सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम

758वें उर्स मुबारक को लेकर स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े और व्यापक इंतजाम किए गए थे। जुलूस के दौरान भारी भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी लगातार मुस्तैद रहे। हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत भी करनी पड़ी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को संभालते हुए कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।

मजार-ए-मुबारक पर पेश किया मेहंदी संदल

दरगाह साबिर पाक पहुंचने के बाद सज्जादा नशीन शाह अली ऐजाज़ कुद्दूसी साबरी ने मजार-ए-मुबारक पर मेहंदी और संदल पेश किया। इसके बाद उन्होंने मौजूद जायरीन में मेहंदी संदल वितरित किया।

इस दौरान दरगाह परिसर “हक साबिर या साबिर, दाता करीम साबिर, मौला करीम साबिर” के नारों से गूंज उठा। साबिर पाक से गहरी अकीदत और मोहब्बत रखने वाले हजारों दीवानों ने नारों के जरिए अपनी श्रद्धा और अकीदत का इज़हार किया। पूरा दरगाह परिसर सूफियाना रंग में रंगा दिखाई दिया।

तिलावत-ए-कुरआन पाक से शुरू हुआ कुल शरीफ

मेहंदी संदल पेश करने के बाद दरगाह परिसर में कुल शरीफ का आयोजन किया गया। हाफिज सऊद ने तिलावत-ए-कुरआन पाक से कुल शरीफ का आगाज़ किया। तिलावत के बाद देश में अमन-ओ-अमान, शांति, खुशहाली और भाईचारे के लिए विशेष दुआ की गई।

दुआ के दौरान दरगाह परिसर में मौजूद हजारों अकीदतमंदों ने हाथ उठाकर मुल्क और पूरी दुनिया में अमन-ओ-सुकून, आपसी भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी।

महफिल-ए-समा में सूफियाना कलाम ने बांधा समां

कुल शरीफ के बाद दरगाह परिसर में महफिल-ए-समा का आयोजन किया गया। मशहूर कव्वाल निजाम साबरी ने अपने सूफियाना कलामों से महफिल में ऐसा समां बांधा कि अकीदतमंद झूम उठे।

कव्वाल निजाम साबरी द्वारा पेश किए गए “साबिर दूल्हा बना आज की रात है” जैसे सूफियाना कलामों ने महफिल में रूहानी रंग भर दिया। कलाम की धुन पर सूफी हजरात और अकीदतमंद झूमते नजर आए। देर रात तक चली महफिल-ए-समा के दौरान पूरा दरगाह परिसर सूफियाना कैफियत में डूबा रहा।

रस्म-ए-मेहंदी डोरी, मजार-ए-मुबारक पर मेहंदी संदल पेश करने, कुल शरीफ और महफिल-ए-समा के साथ साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स मुबारक का रूहानी आगाज़ पूरी शान-ओ-शौकत और अकीदत के साथ हुआ। दूर-दराज से पहुंचे हजारों जायरीन ने बारगाह-ए-साबिर पाक में हाजिरी देकर खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

अब उर्स की आगामी रस्मों के साथ पिरान कलियर में अकीदतमंदों की आमद और बढ़ने की उम्मीद है। साबिर पाक के दीवानों के लिए आने वाले दिन भी रूहानी और सूफियाना रंग से सराबोर रहने वाले हैं।

इस दौरान रस्म में सज्जादा परिवार से साहिबज़ादा शाह यावर ऐजाज़,शाह यासिर ऐजाज़,शाह सुहैल, मुईद खान,शाह ग़ाज़ी,अदील लतीफी,नौमी साबरीं,अमान साबरीं, के अलावा मुनव्वर अली साबरीं,आलम मंसूरी,कुंवर शाहिद,लियाक़त साबरीं,शफ़ीक़ साबरीं,राहुल अरोड़ा,गुरप्रीत,मैसी शाह,चैयरमेन मुहम्मद सलीम,हाजी गुलशाद,सलीम साबरीं,मेराज साबरीं,इस्तकार साबरीं,मुफ़्तुफा त्यागी,तस्लीम त्याग, दरगाह कार्यालय की और से खादिम राव सिकंदर,इल्यास साबरीं,मौजूद रहे

— नई दस्तक, पिरान कलियर

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