आस्था की आड़ में अंधविश्वास का नंगा नाच.! साबिर पाक की दरगाह में कथित ‘हाज़िरी’ के नाम पर पाकीज़गी हो रही तार-तार, जिम्मेदारी खामोश...
"आस्था की आड़ में अंधविश्वास का नंगा नाच.! साबिर पाक की दरगाह में कथित ‘हाज़िरी’ के नाम पर पाकीज़गी हो रही तार-तार, जिम्मेदारी खामोश...
मुनव्वर अली साबरी
नई दस्तक ब्यूरो
पिरान कलियर! दुनियाभर में सूफ़ी संत हज़रत साबिर पाक की दरगाह अपनी रूहानियत, अमन और इंसानियत के पैग़ाम के लिए जानी जाती है, लेकिन अफ़सोस—पिछले कुछ वर्षों में इस मुक़द्दस मरकज़ के हालात तेज़ी से बदले हैं। आस्था के नाम पर अंधविश्वास, और हाज़िरी की आड़ में अश्लीलता व अभद्रता, दरगाह साबिर पाक की पाकीज़गी पर खुलेआम हमला कर रही है। हैरानी की बात यह है कि जिनके कंधों पर दरगाह की निज़ामत और अदब-ओ-एहतराम की ज़िम्मेदारी है, वही लोग मूक दर्शक बने तमाशा देख रहे हैं—या यूँ कहें कि इस बदसूरत मंजर को मौन सहमति दे रहे हैं।
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*नौचंदी जुमेरात पर रूहानियत नहीं, अफ़रातफ़री का राज़.......*
हर साल लाखों ज़ायरीन साबिर पाक की ज़ियारत को पिरान कलियर शरीफ आते हैं। उर्स-ए-साबिरी हो या हर महीने की नौचंदी जुमेरात—यह मुक़द्दस बस्ती अकीदत और मुहब्बत से सराबोर रहती है। इन्हीं ज़ायरीन की बदौलत दरगाह इंतज़ामिया हर वर्ष करोड़ों के ठेके नीलाम करती है, लेकिन सवाल यह है कि अंदरूनी हालात पर नज़र क्यों नहीं...?
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*"महफ़िलखाने के सामने कथित ‘भूत-प्रेत’ का तमाशा....*
दरगाह शरीफ के आसपास सैकड़ों महिलाएं और युवतियां स्थायी डेरा डाले बैठी हैं। सुबह से लेकर इशा की नमाज़ तक, ये महिलाएं कथित जिन-भूत, प्रेतात्मा और बीमारी के नाम पर महफ़िलखाने के सामने उछल-कूद करती नज़र आती हैं।
इनमें से कई महिलाएं अश्लील गालियां, बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल करती हैं, तो कुछ तो ब्लेड से हाथ काटकर खून तक निकाल लेती हैं। हालात यहाँ तक पहुँच चुके हैं कि ये कथित ‘हाज़िरी’ करने वाली महिलाएं ज़ायरीन पर हमला, अपनी चूड़ियां तोड़ना, और मारपीट जैसी हरकतें भी करने लगी हैं।
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*"भगदड़, डर और दहशत—ज़ायरीन हैरान.....*
कई बार ये युवतियां अचानक दरगाह परिसर से बाहर की ओर दौड़ लगा देती हैं, और उनके साथ आए पुरुष उन्हें पकड़ने के लिए पीछे-पीछे भागते हैं। अचानक मची इस भगदड़ को देखकर ज़ायरीन हतप्रभ रह जाते हैं। कई महिला ज़ायरीन तो इस भयावह माहौल से डरकर दरगाह से बाहर निकल आती हैं और दोबारा अंदर जाने की हिम्मत तक नहीं जुटा पातीं।
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*"पीआरडी जवान और कर्मचारी— बने तमाशबीन...*
दरगाह साबिर पाक की पाकीज़गी बनाए रखने के लिए तैनात डेढ़ दर्जन पीआरडी जवान और दरगाह कर्मचारी इन तमाम हरकतों को खामोशी से देखते रहते हैं। और हैरत की इंतहा यह कि इन तमाम गतिविधियों को ‘अंधविश्वास’ नहीं बल्कि ‘हाज़िरी’ का नाम दे दिया गया है। दरगाह कर्मियों द्वारा मस्जिद से बाकायदा एलान होता है— “हाज़िरी वाले बाहर चले जाएं…” यह एलान हर रोज़ इशा की नमाज़ के बाद किया जाता है, लेकिन इसे सिर्फ एक फॉर्मेलिटी कहा जाए तो कोई हर्ज नही।
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*"हाज़िरी या गुस्ताख़ी.? किसे बचा रही इंतज़ामिया...*
जिन कर्मियों को ज़ायरीन को दरगाह के आदाब और प्रोटोकॉल समझाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, वही यह तक नहीं जानते कि हाज़िरी की असल रूह क्या है। दरगाह में उछल-कूद, गालियां, गुस्ताख़ी और बदतमीज़ी को ‘हाज़िरी’ बताकर साबिर पाक की शान में खुली गुस्ताख़ी की जा रही है—और इंतज़ामिया आंखें मूंदे बैठी है।
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*"पुरानी घटनाएं, नए ख़तरे......*
इसी बदइंतजामी के कारण पहले भी दरगाह परिसर में संगीन वारदातों को अंजाम दिया जा चुके हैं। पूर्व में एक व्यक्ति ने दरगाह की जालियों पर हथौड़े से हमला कर नुकसान पहुंचाया था। महफ़िलखाने में एक महिला ने बच्चे को जन्म दे दिया था। इन घटनाओं पर बवाल भी हुआ, पीआरडी जवान भी तैनात किए गए—लेकिन हालात आज भी जस के तस हैं।
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*"सोशल मीडिया पर बदनुमा तस्वीरें वायरल.....*
अब तो स्थिति यह है कि महिलाएं दरगाह की जालियों पर पैर रखकर ऊपरी मुहाने तक चढ़ जाती हैं, और लोग इन शर्मनाक हरकतों की रील बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं। नतीजा—दरगाह साबिर पाक की रूहानियत की जगह अराजकता, अश्लीलता और डर की तस्वीरें दुनिया भर में जा रही हैं।
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*सवाल लाजमी है…*
क्या यह सब आस्था है या अंधविश्वास का कारोबार..? क्या दरगाह इंतज़ामिया की ज़िम्मेदारी सिर्फ ठेके नीलाम करने तक सीमित है...? और सबसे बड़ा सवाल—साबिर पाक की पाकीज़गी की हिफ़ाज़त आखिर कौन करेगा..? जब तक इस बदसूरत हक़ीक़त पर सख़्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक इस रूहानी मरकज़ का जिम्मा रखने वाले यूं ही सवालों के घेरे में रहेगा।
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