उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा की राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा पर हुई विस्तृत चर्चा, तनाव प्रबंधन और शिक्षक आचरण नियमावली की दी जानकारी
उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा की राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा पर हुई विस्तृत चर्चा, तनाव प्रबंधन और शिक्षक आचरण नियमावली की दी जानकारी
रुड़की। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के सभागार में आयोजित पांच दिवसीय कला एवं व्यायाम सेवक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा की राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा, तनाव प्रबंधन तथा शिक्षक आचरण नियमावली जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर राजेंद्र चौधरी ने प्रतिभागियों को इन विषयों की विस्तृत जानकारी देते हुए शिक्षण कार्य में इनके महत्व और व्यावहारिक उपयोग के बारे में बताया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकालीन प्रार्थना के साथ हुआ। इसके पश्चात पहले दिन आयोजित प्रशिक्षण सत्र की आख्या मास्टर ट्रेनर अरुण खरे द्वारा प्रस्तुत की गई। उन्होंने पहले दिन की गतिविधियों, प्रशिक्षण के दौरान हुई चर्चाओं तथा प्रतिभागियों की सहभागिता से संबंधित जानकारी साझा की।
दूसरे दिन के प्रशिक्षण सत्र में मास्टर ट्रेनर राजेंद्र चौधरी ने उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा हेतु राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पाठ्यचर्या केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना है। शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता, रचनात्मकता, व्यवहारिक ज्ञान और जीवन कौशल को महत्व देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, रुचिकर और विद्यार्थी केंद्रित बनाने में राज्य पाठ्यचर्या की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इसके साथ ही उन्होंने तनाव प्रबंधन विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि वर्तमान समय में शिक्षकों के सामने शैक्षणिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ कई प्रकार की चुनौतियां रहती हैं। ऐसे में तनाव को नियंत्रित करना, सकारात्मक सोच बनाए रखना, समय का उचित प्रबंधन करना और कार्यों के बीच संतुलन स्थापित करना बेहद जरूरी है। तनावमुक्त वातावरण न केवल शिक्षक की कार्यक्षमता को बेहतर बनाता है, बल्कि विद्यार्थियों के साथ उनके व्यवहार और शिक्षण की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।
मास्टर ट्रेनर ने शिक्षक आचरण नियमावली के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शिक्षक के दायित्वों, अनुशासन, नैतिक मूल्यों, कार्यस्थल पर जिम्मेदार व्यवहार, विद्यार्थियों के प्रति संवेदनशीलता तथा शैक्षणिक संस्थानों में मर्यादित आचरण के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल शिक्षा प्रदान करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला मार्गदर्शक भी होता है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक के लिए अपने आचरण, व्यवहार और जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहना आवश्यक है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की और प्रशिक्षण गतिविधियों में सहभागिता की। पांच दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य कला एवं व्यायाम सेवकों की कार्यक्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें शिक्षा से जुड़े नवीन दृष्टिकोण, व्यवहारिक जानकारी और आवश्यक कौशलों से परिचित कराना है।
इस अवसर पर मास्टर ट्रेनर सत्येंद्र कुमार, योगराज सिंह, अजय कुमार शर्मा सहित विकास शर्मा, रेखा रावत, वाजिद अली, साजिद अली, विनीता सैनी, अनीता कर्णवाल, अजय शर्मा, रीना देवी, आंचल, अर्चना, आलोक द्विवेदी, तबस्सुम, अक्षय कुमार, डॉ. शकुन सिंह, वर्षा जैन एवं सूरजभान सहित अन्य प्रतिभागी उपस्थित रहे।
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