रूहानियत, इल्म और इंसानियत का पैग़ाम देकर संपन्न हुआ 52वां उर्स-ए-अनवरी

Oct 22, 2026 - 20:49
 0
रूहानियत, इल्म और इंसानियत का पैग़ाम देकर संपन्न हुआ 52वां उर्स-ए-अनवरी

रूहानियत, इल्म और इंसानियत का पैग़ाम देकर संपन्न हुआ 52वां उर्स-ए-अनवरी

पीलीभीत में सादगी और अनुशासन की मिसाल बना चार दिवसीय आयोजन, 30 हाफ़िज़ों को मिलीं डिग्रियां; गद्दीनशीं डॉ. बिलाल हसन चिश्ती ने पेश की इंसानियत और पड़ोसियों के हक़ की खूबसूरत मिसाल

पीलीभीत। रूहानियत की खुशबू, इल्म की रोशनी और इंसानियत के जज़्बे के साथ हकीम सूफी सैयद अनवर अली शाह साहब का 52वां चार दिवसीय उर्स-ए-अनवरी अकीदत और सादगी के माहौल में संपन्न हो गया। यह उर्स महज़ एक धार्मिक आयोजन बनकर नहीं रहा, बल्कि इसने समाज को अमन, भाईचारे, शिक्षा, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और दूसरों के सुकून का एहतराम करने का एक अहम पैग़ाम भी दिया।

उर्स की सबसे खास बात यह रही कि चारों दिन आयोजन में तेज लाउडस्पीकर, कानफाड़ू रिकॉर्डिंग और शोर-शराबे से परहेज किया गया। गद्दीनशीं डॉ. बिलाल हसन चिश्ती ने इस पहल के जरिए यह संदेश दिया कि इबादत की खूबसूरती शोर में नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे नेक इरादे, अदब और इंसानियत में होती है।

उन्होंने कहा कि तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाकर पड़ोसियों, बुजुर्गों और दिल के मरीजों को परेशानी देना उचित नहीं है। 20 माइक लगाकर किसी का सुकून छीनने से सवाब हासिल नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि साउंड सिस्टम पर अनावश्यक खर्च करने के बजाय उस धन से किसी यतीम बच्चे की फीस जमा कराना कहीं बेहतर और नेक काम है।

इल्म की रोशनी से रोशन हुआ उर्स का पैग़ाम

उर्स-ए-अनवरी में शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया। इस अवसर पर कुरआन-ए-पाक हिफ्ज करने वाले 30 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। वक्ताओं ने तालीम की अहमियत पर रोशनी डालते हुए समाज में शिक्षा का प्रसार करने और नई पीढ़ी को इल्म के रास्ते पर आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ शिक्षा, अच्छे अखलाक और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी जीवन में अहम स्थान दिया जाना चाहिए। इल्म की खिदमत और जरूरतमंद बच्चों की मदद ही समाज को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

खामोशी, अदब और अनुशासन बना आयोजन की पहचान

चार दिवसीय उर्स के दौरान आयोजकों ने सादगी और अनुशासन को प्राथमिकता दी। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुए। किसी प्रकार के हुड़दंग, उत्तेजक नारेबाजी और अनावश्यक शोर-शराबे से दूर रहकर आयोजन ने यह मिसाल पेश की कि धार्मिक महफिलें दूसरों के अधिकारों और सुविधाओं का ध्यान रखते हुए भी पूरी रूहानियत के साथ आयोजित की जा सकती हैं।

इस अवसर पर मुरादाबाद, रुड़की, दिल्ली, पंजाब, हरिद्वार, लखनऊ, बरेली और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में जायरीनों ने शिरकत की। उर्स के समापन पर गद्दीनशीं डॉ. बिलाल हसन चिश्ती ने जायरीनों की दस्तारबंदी की, उन्हें लड्डू पेश किए और सभी के लिए दुआएं कीं।

धार्मिक आयोजनों के लिए पेश की नई मिसाल

52वें उर्स-ए-अनवरी का संदेश साफ रहा—दीन की खूबसूरती केवल रस्मों और आयोजनों तक सीमित नहीं, बल्कि पड़ोसियों के सुकून का ख्याल रखने, यतीमों की मदद करने, बच्चों को तालीम दिलाने और समाज में अमन व भाईचारा कायम करने में भी है।

पीलीभीत में संपन्न हुआ यह उर्स इस बात की याद दिलाता है कि जब रूहानियत के साथ सादगी, इल्म के साथ अखलाक और इबादत के साथ इंसानियत जुड़ जाती है, तो धार्मिक आयोजन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाते हैं।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0