अकीदत, इबादत और रूहानियत के संग सजेगी हज़रत अनवर अली शाह के 52वें उर्स की महफ़िल
अकीदत, इबादत और रूहानियत के संग सजेगी हज़रत अनवर अली शाह के 52वें उर्स की महफ़िल
पीलीभीत में 21 अक्टूबर तक चलेगा तीन दिवसीय उर्स-ए-मुबारक, कुरआनख़्वानी, महफ़िल-ए-मिलाद, ज़िक्र और कुल शरीफ़ में जुटेंगे अकीदतमंद
पीलीभीत। सूफ़ियाना तालीमात, इश्क़-ए-इलाही और रूहानी फ़ैज़ की यादों को ताज़ा करने के लिए हज़रत सूफ़ी सैयद मुहम्मद अनवर अली शाह साहब का 52वाँ उर्स-ए-मुबारक अकीदत और एहतराम के साथ शुरू हो गया है। उर्स के आग़ाज़ के साथ ही दरगाह और संबंधित धार्मिक स्थल पर ज़ायरीन की आमद शुरू हो गई है। तीन दिवसीय इस रूहानी आयोजन में इबादत, ज़िक्र-ए-इलाही, नातो-मिलाद और सूफ़ियाना रस्मों के ज़रिये बुज़ुर्गों की तालीमात को याद किया जाएगा।
उर्स का यह मुबारक मौक़ा अकीदतमंदों के लिए केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मोहब्बत, इंसानियत, अदब और रूहानी जुड़ाव का पैग़ाम भी है। आयोजन के दौरान कुरआनख़्वानी, फ़ातिहाख़्वानी, महफ़िल-ए-मिलाद, चादरपोशी, कुल शरीफ़, दस्तारबंदी और कव्वाली सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
ज़िक्र-ओ-अज़कार से रोशन हुई उर्स की शुरुआत
उर्स के पहले दिन शनिवार को नमाज़-ए-फ़ज्र के बाद हल्का-ए-ज़िक्र आयोजित किया गया। सुबह दस बजे कुरआनख़्वानी और फ़ातिहाख़्वानी की रस्म अदा की गई। शाम को नमाज़-ए-मग़रिब के बाद ज़िक्र की महफ़िल सजी, जबकि रात नमाज़-ए-इशा के बाद महफ़िल-ए-मिलाद, सलातो-सलाम और फ़ातिहाख़्वानी के साथ पहले दिन के कार्यक्रम संपन्न हुए।
रूहानी माहौल में अकीदतमंदों ने शिरकत कर बुज़ुर्गाने-दीन के प्रति अपनी मोहब्बत और अकीदत का इज़हार किया।
दूसरे दिन चादरपोशी और कुल शरीफ़ की रौनक
रविवार को नमाज़-ए-फ़ज्र के बाद हल्का-ए-ज़िक्र का कार्यक्रम रखा गया। सुबह 11 बजे आस्ताने पर चादरपोशी की रस्म अदा की जाएगी। इसके बाद नमाज़-ए-अस्र के बाद जामिया अनवर के संस्थापक हज़रत सूफ़ी सैयद मुहम्मद अहमद अली शाह साहब चिश्ती साबरी रहमतुल्लाह अलैह का कुल शरीफ़ अदा किया जाएगा।
उर्स की इन रस्मों में अकीदतमंदों की भागीदारी के साथ दुआ, फ़ातिहा और रूहानी महफ़िलों का सिलसिला जारी रहेगा।
आख़िरी दिन होगा कुल शरीफ़ और दस्तारबंदी का आयोजन
सोमवार को नमाज़-ए-अस्र के बाद आख़िरी कुल शरीफ़ का कार्यक्रम होगा। इसके बाद नमाज़-ए-मग़रिब के बाद मदरसा जामिया अनवर एजुकेशन सोसाइटी की ओर से जश्न-ए-दस्तारबंदी आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के साथ 52वें उर्स-ए-मुबारक का समापन होगा।
मोहब्बत और इंसानियत का पैग़ाम देता है उर्स
सूफ़ी बुज़ुर्गों की परंपरा में उर्स को रूहानी मुहब्बत, भाईचारे और इंसानियत की ख़िदमत के पैग़ाम से जोड़कर देखा जाता है। हज़रत अनवर अली शाह के 52वें उर्स के अवसर पर आयोजित होने वाली महफ़िलें भी अकीदतमंदों को नेक अमल, आपसी मोहब्बत और अमन-ओ-सुकून की राह पर चलने की प्रेरणा देंगी।
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