लापरवाही की बाढ़: पिरान कलियर दरगाह परिसर में घुसा नाली का गंदा पानी, प्रबंधन और नगर पंचायत के दावों की खुली पोल
लापरवाही की बाढ़: पिरान कलियर दरगाह परिसर में घुसा नाली का गंदा पानी, प्रबंधन और नगर पंचायत के दावों की खुली पोल
पिरान कलियर (नई दस्तक)।
विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक के परिसर से व्यवस्थाओं को शर्मसार करने वाली एक बड़ी तस्वीर सामने आई है। मानसून की शुरुआती बारिश ने ही स्थानीय प्रशासन और दरगाह प्रबंधन के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। दरगाह प्रबंधन तंत्र और नगर पंचायत पिरान कलियर की घोर लापरवाही के कारण आज पवित्र दरगाह परिसर में नालियों का गंदा और बदबूदार पानी घुस गया, जिससे यहाँ आने वाले अकीदतमंदों (जायरीन) को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
समय रहते नहीं चेता प्रशासन, जायरीन परेशान
स्थानीय लोगों और दुकानदारों का साफ तौर पर कहना है कि यदि समय रहते दरगाह प्रबंधन तंत्र और नगर पंचायत द्वारा क्षेत्र के बड़े नालों और नालियों की तसल्लीबख्श सफाई कराई गई होती, तो आज यह शर्मनाक स्थिति उत्पन्न नहीं होती। बारिश के पानी की निकासी न होने के कारण नालियां ओवरफ्लो हो गईं और गंदा पानी बहकर सीधे दरगाह परिसर के भीतर तक पहुंच गया। पवित्र स्थल पर फैले इस गंदे पानी के कारण जायरीनों को उसी अस्वच्छ पानी के बीच से गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है।
बार-बार की घटनाओं से भी नहीं लिया कोई सबक
हैरानी की बात यह है कि पिरान कलियर में इस तरह की अव्यवस्था और जलभराव का यह कोई पहला मामला नहीं है। इस तरह की घटनाएं पूर्व में भी कई बार हो चुकी हैं, लेकिन नगर पंचायत पिरान कलियर और दरगाह प्रबंधन तंत्र ने उन पुरानी घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया। हर बार जनता की शिकायतों और भारी फजीहत के बाद प्रशासन कुछ दिनों के लिए जागता है, लेकिन स्थिति सामान्य होते ही फिर से पुरानी ढर्रे पर लौट जाता है। पूर्व के अनुभवों से सीख न लेने का खामियाजा आज फिर यहाँ के ड्रेनेज सिस्टम और बेकसूर जायरीनों को भुगतना पड़ रहा है।
लाखों के बजट के बाद भी ड्रेनेज सिस्टम फेल
हर साल पिरान कलियर में साफ-सफाई और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने के नाम पर लाखों रुपये का बजट ठिकाने लगाया जाता है। इसके बावजूद, पहली गंभीर बारिश में ही नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गए हैं। 'नई दस्तक' की टीम ने जब धरातल पर स्थिति देखी, तो साफ तौर पर नालों में प्लास्टिक और कूड़े का अंबार जमा मिला, जो यह साबित करने के लिए काफी है कि कागजों में हुई सफाई जमीन पर कहीं नजर नहीं आई।
स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि:
"यह पिरान कलियर जैसी पवित्र और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर जगह का अपमान है। अधिकारी एसी कमरों से बाहर नहीं निकलते और जब बारिश होती है, तो पूरा खामियाजा यहाँ आने वाले मेहमानों और स्थानीय व्यापारियों को भुगतना पड़ता है। बार-बार होने वाली इस समस्या का अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।"
'नई दस्तक' के तीखे सवाल:
- जब मानसून की तारीखें पहले से तय थीं, और पूर्व में भी ऐसी घटनाएं हो चुकी थीं, तो समय रहते नालों की मुकम्मल सफाई क्यों नहीं की गई?
- दरगाह प्रबंधन तंत्र बार-बार होने वाली इस गंभीर लापरवाही पर मूकदर्शक क्यों बना रहता है?
- क्या बार-बार एक ही गलती दोहराने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर कोई सख्त कार्रवाई होगी, या फिर हर बार की तरह इस बार भी मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
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अब देखना यह होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद क्या नगर पंचायत और दरगाह प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से जागता है और इसका कोई स्थायी समाधान निकालता है, या फिर जायरीन इसी तरह बदहाली के आंसू बहाने को मजबूर रहेंगे।
(रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, नई दस्तक)
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