साबिर पाक का 758वां उर्स अव्यवस्थाओं और प्रशासनिक लापरवाही के लिए हमेशा याद किया जाएगा

Sep 3, 2026 - 11:00
 0

साबिर पाक का 758वां उर्स अव्यवस्थाओं और प्रशासनिक लापरवाही के लिए हमेशा याद किया जाएगा

बारिश से जलभराव, मुख्य तारीखों में बिजली गुल, जाम नालों ने बढ़ाई जायरीन की मुश्किलें; बदहाल सड़कों और जर्जर पुल ने भी खोली व्यवस्थाओं की पोल

नई दस्तक:-(मुनव्वर अली साबरीं)

पिरान कलियर। हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक की दरगाह पिरान कलियर में संपन्न हुआ 758वां सालाना उर्स मुबारक इस बार अकीदत और रूहानियत के साथ-साथ अव्यवस्थाओं और प्रशासनिक लापरवाही के लिए भी लंबे समय तक याद किया जाएगा।

उर्स में देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में जायरीन पिरान कलियर पहुंचे, लेकिन उर्स के दौरान उन्हें कई बुनियादी समस्याओं से जूझना पड़ा। बारिश ने जहां मेला क्षेत्र की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी, वहीं मुख्य तारीखों में लंबे समय तक बिजली गुल रहने से जायरीन को भारी परेशानी उठानी पड़ी।

नालों की सफाई नहीं होने से मेला क्षेत्र बना जलभराव का शिकार

बारिश के दौरान दरगाह क्षेत्र में बने नालों की सफाई व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए। नालों की पर्याप्त सफाई नहीं होने के कारण बारिश के पानी की निकासी नहीं हो सकी और देखते ही देखते मेला क्षेत्र के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई।

बाजारों, झूला-सर्कस ग्राउंड, जायरीन द्वारा लगाए गए टेंटों के साथ-साथ प्रशासन की ओर से जायरीन के लिए बनाए गए जर्मन हैंगरों तक में पानी भर गया। इससे दूर-दराज से पहुंचे जायरीन को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

कई जायरीन को अपने सामान और जरूरी सामान को पानी से बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब उर्स की तैयारियां लंबे समय से चल रही थीं, तो जल निकासी की व्यवस्था को लेकर पहले से प्रभावी इंतजाम क्यों नहीं किए गए?

बिजली कटौती ने बढ़ाई परेशानी

उर्स की मुख्य तारीखों में बिजली गुल रहने की समस्या ने भी जायरीन की परेशानी बढ़ा दी। हजारों जायरीन की मौजूदगी वाले इस बड़े धार्मिक आयोजन में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा का बाधित होना प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े करता नजर आया।

बारिश, जलभराव और बिजली कटौती—इन तीनों समस्याओं के बीच जायरीन को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

बदहाल सड़कों ने भी खोली व्यवस्थाओं की पोल

पिरान कलियर पहुंचने वाले प्रमुख मार्गों की हालत भी इस उर्स के दौरान चर्चा का विषय बनी रही। कोर कॉलेज की ओर से भगवानपुर की तरफ आने वाली सड़क हो या रुड़की की ओर से कलियर पहुंचने वाला मार्ग, कई स्थानों पर सड़क की खराब हालत के कारण जायरीन को आवागमन में भारी परेशानी उठानी पड़ी।

वहीं 165 वर्ष पुराने पुल की दयनीय स्थिति भी चिंता का विषय बनी रही। इतने बड़े धार्मिक आयोजन में जब देश के विभिन्न हिस्सों से जायरीन यहां पहुंचते हैं, तब मुख्य मार्गों और पुराने पुल की स्थिति को लेकर प्रशासन से बेहतर तैयारी की उम्मीद की जाती है।

क्या उर्स की व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह गईं?

साबिर पाक के 758वें उर्स की व्यवस्थाओं को देखकर ऐसा प्रतीत हुआ कि प्रशासन ने इतना बड़ा आयोजन कहीं न कहीं ऊपर वाले के भरोसे छोड़ दिया था।

उर्स जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले धार्मिक आयोजन में लाखों जायरीन के पहुंचने की संभावना पहले से रहती है। इसके बावजूद जल निकासी, बिजली, सड़क और आवागमन जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं में सामने आई खामियां कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

बारिश कोई नई समस्या नहीं है और न ही उर्स के दौरान जायरीन की भारी भीड़ पहली बार पहुंची थी। ऐसे में सवाल यही है कि क्या प्रशासन ने पिछले अनुभवों से कोई सबक नहीं लिया?

जायरीन की अकीदत के आगे व्यवस्थाएं हुईं बेबस

तमाम परेशानियों के बावजूद जायरीन की अकीदत में कोई कमी नहीं आई। बारिश और अव्यवस्थाओं के बीच भी अकीदतमंद साबिर पाक की दरगाह पर हाजिरी देने पहुंचते रहे।

लेकिन इस उर्स ने प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ दिया है—अगर आने वाले वर्षों में जायरीन की संख्या और बढ़ती है, तो क्या व्यवस्थाएं इसी तरह भगवान भरोसे चलती रहेंगी?

758वां उर्स अकीदत की यादों के साथ-साथ प्रशासनिक तैयारियों की कमियों के कारण भी याद रखा जाएगा। अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी इन खामियों की समीक्षा करें और अगले उर्स से पहले ठोस एवं स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि जायरीन को अकीदत के सफर में बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष न करना पड़े।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0