सुरक्षित बचपन अभियान: कलियर, धनौरी, इमलीखेड़ा में छात्र-छात्राओं को बताए बाल अधिकार और सुरक्षा कानून
सुरक्षित बचपन अभियान: कलियर, धनौरी, इमलीखेड़ा में छात्र-छात्राओं को बताए बाल अधिकार और सुरक्षा कानून
हरिद्वार। बच्चों को सुरक्षित, भयमुक्त और शोषणमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हरिद्वार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) एवं पुलिस विभाग की ओर से जागरूकता अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को सुरक्षित बचपन अभियान के तहत कलियर, धनौरी, इमलीखेड़ा और माजरी के विभिन्न विद्यालयों में विधिक जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रमों में न्यायिक अधिकारियों एवं पुलिस अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को बाल अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े कानूनों की जानकारी दी।
चार विद्यालयों में आयोजित हुए जागरूकता कार्यक्रम
अभियान के तहत राजाबाबू इंटर कॉलेज, आसफनगर धनौरी में ACJM हरिद्वार तथा उपनिरीक्षक महिपाल सैनी की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहीं, MGFM इंटर कॉलेज, कलियर में प्रथम अपर जिला जज रुड़की अम्बिका पंत, प्रभारी निरीक्षक कमल मोहन भंडारी और वरिष्ठ उपनिरीक्षक रमेश कुमार सैनी ने छात्र-छात्राओं को जागरूक किया।
माजरी इंटर कॉलेज में ACJM द्वितीय रुड़की विपिन जी एवं अपर उपनिरीक्षक सूरज नेगी की मौजूदगी में कार्यक्रम हुआ। इसके अलावा राजकीय इंटर कॉलेज, इमलीखेड़ा में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम रुड़की दीप्ति पंत तथा उपनिरीक्षक योगेश कुमार की उपस्थिति में बच्चों को सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई।
बाल अधिकारों और पॉक्सो कानून पर किया जागरूक
कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें मानसिक एवं शारीरिक शोषण से बचाव के उपायों की जानकारी देना रहा। इस दौरान पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की बुनियादी जानकारी, बच्चों की सुरक्षा तथा किसी भी अनुचित व्यवहार या शोषण की स्थिति में मदद लेने के संबंध में जागरूकता पर जोर दिया गया।
न्यायिक अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों ने बच्चों को कानून के प्रति जागरूक रहने और किसी भी समस्या की स्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति, विद्यालय प्रबंधन अथवा संबंधित अधिकारियों से सहायता लेने के महत्व को समझाया।
न्यायिक अधिकारियों और पुलिस के संयुक्त प्रयास की सराहना
कार्यक्रमों के दौरान छात्र-छात्राओं एवं स्थानीय लोगों को अपनी शंकाएं रखने और अधिकारियों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला। इस संवाद के माध्यम से लोगों ने कानूनी प्रक्रियाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को समझा।
विद्यालय प्रबंधन, स्थानीय नागरिकों और छात्र-छात्राओं ने इस पहल की सराहना की। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं पुलिस विभाग का यह संयुक्त प्रयास बच्चों में कानूनी जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित बचपन की अवधारणा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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