विश्वप्रसिद्ध दरगाह पिरान कलियर में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, दो माह में सामने आईं कई संगीन घटनाएं

Oct 27, 2026 - 16:57
Oct 27, 2026 - 16:59
 0
विश्वप्रसिद्ध दरगाह पिरान कलियर में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, दो माह में सामने आईं कई संगीन घटनाएं

विश्वप्रसिद्ध दरगाह पिरान कलियर में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, दो माह में सामने आईं कई संगीन घटनाएं

मासूम से दुष्कर्म, गेस्ट हाउस में आत्महत्या और नाबालिगों के वीडियो वायरल होने के मामलों ने बढ़ाई चिंता; पुलिस कार्रवाई के बावजूद असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाने की चुनौती

नई दस्तक:-(मुनव्वर अली साबरीं)

पिरान कलियर, हरिद्वार। विश्वप्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक की नगरी पिरान कलियर में पिछले कुछ समय के दौरान सामने आईं आपराधिक घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में जायरीन और श्रद्धालु यहां जियारत के लिए पहुंचते हैं, लेकिन क्षेत्र में सामने आ रहे गंभीर अपराधों और असामाजिक गतिविधियों ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

बीते दो माह के घटनाक्रम पर नजर डालें तो 6 अक्टूबर को रैन बसेरे में एक मासूम के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया। इसके बाद 14 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर से पिरान कलियर पहुंचे एक यूट्यूबर की गेस्ट हाउस में आत्महत्या का मामला चर्चा में आया। वहीं, गेस्ट हाउस के कमरों से नाबालिगों से संबंधित वीडियो वायरल होने के प्रकरणों ने भी क्षेत्र की छवि और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

इन मामलों में पुलिस की ओर से कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन लगातार सामने आ रहे गंभीर प्रकरणों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि आखिर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम कब उठाए जाएंगे?

रैन बसेरे में मासूम से दुष्कर्म की घटना ने झकझोरा

6 अक्टूबर को रैन बसेरे में मासूम के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई। धार्मिक नगरी में इस तरह की घटना सामने आना बेहद गंभीर विषय है। सार्वजनिक सुविधाओं और श्रद्धालुओं के ठहरने से जुड़े स्थानों पर सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था होना आवश्यक है, ताकि किसी भी बच्चे, महिला या अन्य व्यक्ति के साथ इस तरह का अपराध न हो सके।

इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया कि संवेदनशील स्थानों पर निगरानी, सुरक्षा इंतजाम और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

गेस्ट हाउस में आत्महत्या के मामले ने खींचा ध्यान

14 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर से पिरान कलियर पहुंचे एक यूट्यूबर की गेस्ट हाउस में आत्महत्या का मामला सामने आया। इस घटना ने भी क्षेत्र के गेस्ट हाउसों में ठहरने वाले लोगों की सुरक्षा और वहां की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा तेज कर दी।

इसके बाद गेस्ट हाउस के कमरों से नाबालिगों से संबंधित वीडियो वायरल होने के प्रकरण सामने आने से मामला और गंभीर हो गया। ऐसे मामलों में पुलिस जांच, आरोपियों की पहचान, डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण और पीड़ितों की निजता की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

वायरल वीडियो के मामलों ने बढ़ाई चिंता, पॉक्सो में दर्ज हुए मुकदमे

इसी माह नाबालिगों से संबंधित वायरल वीडियो के तीन मामले सामने आने की जानकारी दी गई है। इनमें पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर एक आरोपी को जेल भेजा है। वहीं, सोमवार को सामने आए एक नए प्रकरण में भी पॉक्सो अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी है। इस मामले में आरोपी के फरार होने की बात कही जा रही है।

नाबालिगों से जुड़े मामलों में त्वरित और निष्पक्ष जांच के साथ-साथ पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखना भी कानूनन और मानवीय दृष्टि से बेहद जरूरी है। वायरल सामग्री को साझा करना या दोबारा प्रसारित करना पीड़ितों को और नुकसान पहुंचा सकता है।

लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बीच पुलिस के सामने चुनौती केवल आरोपियों को गिरफ्तार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे अपराधों को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी और निवारक कार्रवाई सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

शाम होते ही बाजारों में बढ़ती मनचलों की गतिविधियां

स्थानीय स्तर पर एक अन्य चिंता बाजारों में शाम के बाद असामाजिक तत्वों और मनचलों की गतिविधियों को लेकर जताई जा रही है। आरोप है कि कुछ युवक समूह बनाकर देर रात तक बाजारों में घूमते रहते हैं और आने-जाने वाली महिलाओं तथा युवतियों पर फब्तियां कसने एवं छेड़छाड़ जैसी हरकतें करते हैं।

ऐसी गतिविधियों के कारण कई बार स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच कहासुनी की स्थिति पैदा हो जाती है। यदि इन शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो इससे क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बन सकता है।

हालांकि, इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति का आकलन पुलिस गश्त, दर्ज शिकायतों और स्थानीय स्तर पर सत्यापन के आधार पर किया जाना चाहिए। साथ ही, किसी भी व्यक्ति या समूह के खिलाफ कार्रवाई तथ्यों और कानून के अनुरूप होनी चाहिए।

क्या पिरान कलियर में अपराधियों को कानून का खौफ नहीं?

पिरान कलियर देशभर में धार्मिक आस्था और सूफी परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु अमन, सुकून और आध्यात्मिक अनुभव की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में क्षेत्र में गंभीर आपराधिक घटनाओं और महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों का सामने आना चिंता का विषय है।

लगातार सामने आ रहे मामलों ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या मौजूदा निगरानी और गश्त व्यवस्था पर्याप्त है? क्या गेस्ट हाउसों की नियमित जांच हो रही है? क्या संदिग्ध गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई की जा रही है? और क्या देर रात बाजारों में पुलिस की मौजूदगी प्रभावी है?

इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों की कार्रवाई और जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था में सुधार से ही मिल सकेगा।

ऑपरेशन प्रहार की प्रभावशीलता पर भी उठ रहे सवाल

हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर की ओर से अपराधियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ ऑपरेशन प्रहार के तहत कार्रवाई की जा रही है। जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में पुलिस कार्रवाई की खबरें भी सामने आती रही हैं। इसके बावजूद पिरान कलियर में लगातार सामने आ रहे मामलों ने इस अभियान के स्थानीय स्तर पर प्रभाव और निरंतरता को लेकर सवाल पैदा किए हैं।

यह कहना उचित नहीं होगा कि पुलिस कार्रवाई पूरी तरह निष्प्रभावी है, क्योंकि कई मामलों में मुकदमे दर्ज होने और गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। लेकिन अपराध की रोकथाम के लिहाज से केवल घटना के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। पुलिस को संवेदनशील स्थानों की पहचान कर पहले से सुरक्षा उपाय मजबूत करने होंगे।

सुरक्षा के लिए उठाने होंगे ठोस कदम

पिरान कलियर में श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं:

  • गेस्ट हाउसों की नियमित जांच: पहचान संबंधी नियमों का पालन, रिकॉर्ड का सत्यापन और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी।
  • रात्रि गश्त में मजबूती: बाजारों, प्रमुख रास्तों, पार्किंग स्थलों और संवेदनशील स्थानों पर नियमित पुलिस गश्त।
  • सीसीटीवी निगरानी: प्रमुख चौराहों और बाजारों में कैमरों की उपलब्धता तथा उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित करना।
  • महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा: शिकायत मिलने पर तत्काल सहायता, संवेदनशील मामलों में गोपनीयता और त्वरित जांच।
  • असामाजिक गतिविधियों पर कार्रवाई: छेड़छाड़, उत्पीड़न और सार्वजनिक स्थानों पर हुड़दंग की शिकायतों पर कानून के अनुसार कार्रवाई।
  • स्थानीय समन्वय: पुलिस, प्रशासन, नगर पंचायत, गेस्ट हाउस संचालकों और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच नियमित समन्वय।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और धार्मिक नगरी की छवि का सवाल

पिरान कलियर की पहचान देशभर में धार्मिक आस्था, सूफियाना परंपरा और भाईचारे से जुड़ी है। यहां आने वाले जायरीन की सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सभी संबंधित विभागों और स्थानीय व्यवस्था की साझा जिम्मेदारी है।

यदि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर प्रभावी रोकथाम नहीं हुई और असामाजिक गतिविधियों पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया, तो श्रद्धालुओं के मन में असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। इसका असर क्षेत्र की प्रतिष्ठा और धार्मिक पर्यटन पर भी पड़ सकता है।

अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित अधिकारी सामने आए मामलों की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ अपराध की रोकथाम के लिए ठोस और दिखाई देने वाले कदम उठाएं। पुलिस की कार्रवाई का वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब आम नागरिक और यहां आने वाले श्रद्धालु खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे।

नई दस्तक का सवाल: विश्वप्रसिद्ध धार्मिक नगरी पिरान कलियर में सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए पुलिस तथा प्रशासन अब कौन से ठोस कदम उठाएंगे? इसका जवाब आने वाले समय में जमीनी कार्रवाई से ही सामने आएगा।

What's Your Reaction?

Like Like 1
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0