पिरान कलियर में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, वायरल वीडियो ने खोली निगरानी व्यवस्था की पोल?
पिरान कलियर में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, वायरल वीडियो ने खोली निगरानी व्यवस्था की पोल?
9 पीआरडी जवानों पर हर माह लाखों रुपये खर्च, फिर भी फर्जी खादिमों और कथित अवैध वसूली पर लगाम क्यों नहीं?
नई दस्तक:-(मुनव्वर अली साबरी)
पिरान कलियर। विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक (रह.) में देशभर से जायरीन अकीदत और उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। कोई मन्नत लेकर आता है तो कोई दुआओं के साथ दरबार में हाजिरी देता है। लेकिन दरगाह परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर सामने आ रहे लगातार सवाल अब सिर्फ अव्यवस्था तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
ताजा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो से जुड़ा है। वीडियो में एक पीआरडी जवान एक युवक से पैसे लेते हुए दिखाई दे रहा है। युवक को कथित तौर पर फर्जी खादिम बताया जा रहा है। वीडियो में दोनों के बीच बातचीत होती दिखाई देती है और इसके बाद युवक कथित रूप से पीआरडी जवान के हाथ में पैसे रखकर वहां से चला जाता है।
हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि पैसे किस कारण दिए गए थे। युवक वास्तव में फर्जी खादिम है या नहीं और पीआरडी जवान ने रकम किस उद्देश्य से ली, यह जांच का विषय है। लेकिन वीडियो ने दरगाह परिसर में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
दरगाह की सुरक्षा पर हर माह लाखों का खर्च
जानकारी के अनुसार दरगाह शरीफ की सुरक्षा व्यवस्था के लिए 9 पीआरडी जवान तैनात किए गए हैं। आरोप है कि इन जवानों को दरगाह के खाते से मानदेय का भुगतान किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक एक पीआरडी जवान के लिए करीब 18 हजार रुपये प्रतिमाह का भुगतान बताया जा रहा है।
इस हिसाब से 9 जवानों पर करीब 1 लाख 62 हजार रुपये प्रतिमाह, जबकि सालाना करीब 19 लाख 44 हजार रुपये खर्च बैठता है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सुरक्षा व्यवस्था पर दरगाह की ओर से हर साल इतनी बड़ी राशि खर्च की जा रही है, तो दरगाह परिसर में फर्जी खादिमों की सक्रियता, जायरीनों से कथित वसूली, जेब कटने और अन्य शिकायतों पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही?
नोट: उपरोक्त राशि उपलब्ध कराई गई 18,000 रुपये प्रति जवान प्रतिमाह की जानकारी के आधार पर गणना की गई है। वास्तविक भुगतान की पुष्टि संबंधित अभिलेखों से होना आवश्यक है।
सुरक्षा के लिए तैनात जवानों की भूमिका पर भी निगाह जरूरी
दरगाह में तैनात सुरक्षा कर्मियों की प्राथमिक जिम्मेदारी जायरीनों की सुरक्षा, परिसर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना है। ऐसे में यदि कोई सुरक्षाकर्मी ही कथित तौर पर किसी संदिग्ध व्यक्ति से रकम लेते हुए वीडियो में दिखाई देता है, तो स्वाभाविक रूप से उसकी भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है।
सवाल यह भी है कि यदि परिसर में कथित तौर पर अवैध वसूली या फर्जी खादिमों की गतिविधियां चल रही हैं, तो सुरक्षा कर्मियों और संबंधित कर्मचारियों की निगरानी व्यवस्था क्या है?
क्या तैनात जवानों की नियमित मॉनिटरिंग होती है?
क्या ड्यूटी के दौरान होने वाली गतिविधियों का रिकॉर्ड रखा जाता है?
क्या दरगाह परिसर में सक्रिय कथित फर्जी खादिमों की पहचान के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था है?
इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए।
सुबह दरगाह खुलने से पहले क्या होता है?
मामले का एक गंभीर पहलू दरगाह की शुरुआती गतिविधियों से भी जुड़ा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि सुबह दरगाह खुलने और कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों के नियमित रूप से ड्यूटी पर पहुंचने से पहले ही परिसर में कुछ लोगों की गतिविधियां शुरू हो जाती हैं।
यदि इन आरोपों में सच्चाई है और किसी प्रकार की अवैध वसूली या चढ़ावे से छेड़छाड़ होती है, तो यह केवल सुरक्षा में चूक नहीं बल्कि दरगाह की आय और धार्मिक प्रतिष्ठा से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।
हालांकि इन आरोपों की भी जांच आवश्यक है और बिना जांच किसी व्यक्ति अथवा कर्मचारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
वर्षों से उठ रहे सवाल, फिर भी स्थायी समाधान क्यों नहीं?
दरगाह परिसर में फर्जी खादिमों, जायरीनों से कथित पैसे मांगने, जेब कटने, मारपीट और अव्यवस्थाओं की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। वायरल वीडियो ने पुराने सवालों को एक बार फिर सामने ला दिया है।
दरगाह की व्यवस्था दरगाह कार्यालय के अधीन है और रुड़की ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की निगरानी में प्रशासनिक व्यवस्थाएं संचालित होती हैं। कार्यालय में प्रबंधक, सुपरवाइजर और अन्य कर्मचारी तैनात हैं। इसके साथ सुरक्षा के लिए पीआरडी जवानों की व्यवस्था भी है।
इसके बावजूद यदि जायरीन खुद को असुरक्षित महसूस करें या दरगाह परिसर में कथित वसूली की शिकायतें लगातार सामने आती रहें, तो व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही की समीक्षा होना जरूरी है।
सवाल दरगाह की प्रतिष्ठा और जायरीनों के भरोसे का
दरगाह साबिर पाक केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों अकीदतमंदों की आस्था का केंद्र है। यहां आने वाला जायरीन यह भरोसा लेकर आता है कि उसे सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिलेगा।
ऐसे में किसी वायरल वीडियो में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यक्ति की संदिग्ध भूमिका दिखाई देना सामान्य घटना नहीं मानी जा सकती। यदि वीडियो में दिख रही घटना वास्तविक है तो इसकी निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। और यदि वीडियो का संदर्भ कुछ और है, तो वह भी जांच के माध्यम से स्पष्ट होना चाहिए।
नई दस्तक का सवाल सीधा है—
दरगाह की सुरक्षा के लिए तैनात जवानों की निगरानी कौन कर रहा है?
फर्जी खादिमों और कथित वसूली पर रोक लगाने की जिम्मेदारी किसकी है?
दरगाह के खाते से सुरक्षा पर खर्च होने वाली लाखों रुपये की राशि के बदले जवाबदेही किसकी तय होगी?
इन सवालों का जवाब किसी आरोप या सोशल मीडिया की चर्चा से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, रिकॉर्ड की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की स्पष्ट कार्रवाई से सामने आना चाहिए।
क्योंकि दरगाह की सुरक्षा केवल दीवारों और दरवाजों की सुरक्षा नहीं है। यह उन लाखों जायरीनों के भरोसे की सुरक्षा भी है, जो यहां दुआ लेकर आते हैं।
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