पिरान कलियर में सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल, गंदगी और बदबू से स्थानीय लोगों के साथ जायरीन परेशान

Sep 11, 2026 - 09:22
Sep 11, 2026 - 09:24
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पिरान कलियर में सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल, गंदगी और बदबू से स्थानीय लोगों के साथ जायरीन परेशान

पिरान कलियर में सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल, गंदगी और बदबू से स्थानीय लोगों के साथ जायरीन परेशान

दरगाह शरीफ आने वाले प्रमुख मार्गों, पार्किंग स्थलों और नालियों में गंदगी का अंबार; उर्स सम्पन्न होने के बाद मक्खियों का प्रकोप बढ़ने का दावा

नई दस्तक:-(मुनव्वर अली साबरीं)

पिरान कलियर/हरिद्वार। विश्वप्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक, पिरान कलियर में इन दिनों सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दरगाह शरीफ में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाले जायरीन भी कथित तौर पर गंदगी, दुर्गंध और नालियों की बदहाल स्थिति से परेशान हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दरगाह शरीफ की ओर आने वाले कई प्रमुख मार्गों पर लंबे समय से सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। जगह-जगह कूड़ा जमा होने और नालियों के गंदगी से अटे होने के कारण वातावरण में दुर्गंध जैसी स्थिति बनी हुई है। उर्स सम्पन्न होने के बाद क्षेत्र में मक्खियों का प्रकोप बढ़ने की बात भी स्थानीय लोगों द्वारा कही जा रही है।

कई प्रमुख स्थानों पर सफाई व्यवस्था सवालों के घेरे में

स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों के अनुसार रुड़की रोड स्थित हज हाउस के सामने की पार्किंग, दरगाह के समीप स्थित पार्किंग, वीआईपी रोड तथा तालाब किनारे समेत कई स्थानों पर गंदगी जमा है।

बताया जा रहा है कि क्षेत्र की छोटी-बड़ी नालियां और नाले भी कई जगह गंदगी से ऊपर तक भरे हुए दिखाई देते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नियमित सफाई व्यवस्था होने के बावजूद इन स्थानों पर इतनी गंदगी कैसे जमा हो रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुबह के समय कुछ स्थानों पर सफाई कर्मचारी सफाई करते दिखाई देते हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण स्थानों और नालियों की समुचित सफाई नहीं हो पाती। उनका कहना है कि यदि नियमित और प्रभावी सफाई की जा रही है तो फिर प्रमुख मार्गों, पार्किंग स्थलों और नालियों में गंदगी का यह हाल क्यों दिखाई दे रहा है?

दरगाह प्रशासन और नगर पंचायत की भूमिका पर सवाल

पिरान कलियर में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी अलग-अलग स्तर पर संबंधित विभागों और संस्थाओं से जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दरगाह कार्यालय के अंतर्गत दर्जनों सफाई कर्मचारी मौजूद हैं, वहीं नगर पंचायत पिरान कलियर में भी सफाई कर्मचारियों की तैनाती है।

इसके बावजूद यदि दरगाह क्षेत्र के आसपास गंदगी, कूड़े के ढेर और जाम नालियों की स्थिति बनी हुई है तो यह व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि दरगाह प्रशासन और नगर पंचायत पिरान कलियर संयुक्त रूप से क्षेत्र का निरीक्षण कर उन स्थानों को चिन्हित करें जहां सफाई व्यवस्था लगातार प्रभावित है और वहां नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।

जायरीन से वसूली जाने वाली सुविधाओं पर भी सवाल

सफाई व्यवस्था के साथ-साथ दरगाह क्षेत्र में जायरीन को उपलब्ध कराई जाने वाली मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार दरगाह प्रशासन की ओर से प्रतिवर्ष विभिन्न व्यवस्थाओं और सुविधाओं से संबंधित ठेके नीलाम किए जाते हैं। इनमें शौचालयों के संचालन से संबंधित ठेके भी शामिल बताए जाते हैं।

यदि शौचालयों के उपयोग के लिए जायरीन से शुल्क लिया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि शुल्क के बदले उन्हें किस स्तर की स्वच्छता और सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है?

सवाल केवल शुल्क वसूली का नहीं, बल्कि सुविधा की गुणवत्ता और जवाबदेही का भी है। यदि किसी सुविधा के लिए जायरीन से पैसा लिया जा रहा है तो वहां स्वच्छता, पानी, नियमित सफाई और बेहतर रखरखाव सुनिश्चित करना संबंधित व्यवस्था की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

उर्स के बाद सफाई व्यवस्था की चुनौती और बढ़ी

पिरान कलियर में उर्स के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचते हैं। इतने बड़े धार्मिक आयोजन के बाद कूड़ा-कचरा और सफाई व्यवस्था को सामान्य स्थिति में लाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है।

ऐसे में उर्स सम्पन्न होने के बाद विशेष सफाई अभियान चलाना और प्रमुख मार्गों, पार्किंग स्थलों, नालियों तथा सार्वजनिक सुविधाओं की नियमित निगरानी करना जरूरी हो जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उर्स समाप्त होने के बाद अब क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए विशेष सफाई अभियान की जरूरत है, ताकि गंदगी के कारण बीमारी फैलने और दुर्गंध की समस्या को रोका जा सके।

आखिर किसकी है जिम्मेदारी?

पिरान कलियर जैसे विश्वप्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर देश-विदेश से आने वाले जायरीन के सामने यदि गंदगी और दुर्गंध की स्थिति दिखाई देती है तो यह केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि क्षेत्र की छवि से जुड़ा विषय भी है।

ऐसे में कुछ सवाल सीधे तौर पर संबंधित जिम्मेदारों से जवाब मांगते हैं—

  • दरगाह क्षेत्र के प्रमुख मार्गों और पार्किंग स्थलों की नियमित सफाई की निगरानी कौन करता है?
  • दरगाह प्रशासन और नगर पंचायत के कितने सफाई कर्मचारी क्षेत्र में तैनात हैं?
  • उनकी ड्यूटी का दैनिक रिकॉर्ड और निरीक्षण व्यवस्था क्या है?
  • नालियों और नालों की नियमित सफाई का शेड्यूल क्या है?
  • उर्स सम्पन्न होने के बाद विशेष सफाई अभियान क्यों नहीं दिखाई दे रहा?
  • शौचालयों के ठेकों से मिलने वाली राशि और जायरीन से वसूले जाने वाले शुल्क के बदले उन्हें कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं?
  • सफाई व्यवस्था की शिकायतों पर कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था क्या है?

नई दस्तक की पड़ताल का सवाल

पिरान कलियर की पहचान सिर्फ एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि देशभर से आने वाले जायरीन की आस्था के केंद्र के रूप में है। ऐसे में यहां स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब दरगाह प्रशासन और नगर पंचायत दोनों स्तर पर सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था होने का दावा किया जाता है, तो फिर दरगाह के आसपास गंदगी, जाम नालियों और दुर्गंध की शिकायतें लगातार क्यों सामने आ रही हैं?

इस मामले में दरगाह प्रशासन और नगर पंचायत पिरान कलियर का आधिकारिक पक्ष सामने आया है

नगर पंचायत पिरान कलियर ईओ का कहना है कि हज होउस रोड तालाब किनारा वीआईपी रोड हज हाउस के सामने बनी पार्किंग दरगाह क्षेत्र की पार्किन व दरगाह क्षेत्र उनके कार्यक्षेत्र में नही आता है इन स्थानों पर सफाई करने की ज़िम्मेदारी दरगाह सफाई कर्मचारियों की है जबकि दरगाह सफाई सुपरवाइज़र राव सिकंदर का कहना है कि क़ब्रिस्तान के सामने लगी दुकाने तालाब किनारे लगी दुकानों नगर पंचायत अपनी होने का दावा करती है तो वहां सफाई करने की ज़िम्मेदारी भी नगर पंचायत की होनी चाहिए वहीं उन्होंने बताया पिछले वर्ष उर्स में पिरान कलियर नगर पंचायत को मेला क्षेत्र की सफाई का ठेका 31 लाख में दिया गया था नगर पंचायत की सफाई व्यवस्था दुरुस्त नही थी इस बार यह ठेका रुड़की नगर निगम को 21 लाख रुपये में दिया है।

अब यहां सवाल यह खड़ा होता है कि नगर निगम रुड़की दरगाह से 21लाख रुपये का ठेका लेने के बाद भी सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई रही जबकि दरगाह प्रबंधन तंत्र और नगर पंचायत एक दूसरे को ज़िम्मेदार बता कर पल्ला झाड़ रहे हैं।

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