पिरान कलियर का रेन बसेरा बना सवालों के घेरे में, जायरीन की सुविधा पर अपराधियों का कब्जा?
पिरान कलियर का रेन बसेरा बना सवालों के घेरे में, जायरीन की सुविधा पर अपराधियों का कब्जा?
छह साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले सहित आपराधिक घटनाओं ने बढ़ाई चिंता, दरगाह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
पिरान कलियर। विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक (रह.) में आने वाले जायरीन की सुविधा के लिए बनाया गया रेन बसेरा आज अपनी मूल उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है। जायरीन को ठहरने की सुविधा देने के लिए बनाए गए इस रेन बसेरे में कथित तौर पर लंबे समय से कुछ लोगों के डेरा जमाए रहने और लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं ने दरगाह प्रशासन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाल ही में छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म का मामला सामने आने और पूर्व में यहां से संदिग्ध अथवा आरोपित लोगों के पकड़े जाने की घटनाओं ने इस स्थान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, प्रत्येक मामले के तथ्यों और आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच के आधार पर ही की जानी चाहिए, लेकिन इन घटनाओं के मद्देनजर रेन बसेरे की निगरानी और संचालन व्यवस्था की समीक्षा बेहद जरूरी हो गई है।
महीनों से डेरा जमाए लोगों की आखिर कौन करेगा जांच?
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के मुताबिक, रेन बसेरे में कुछ लोग कथित तौर पर महीनों से रह रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इन लोगों के ठहरने की अनुमति किसने दी है? क्या इनके पहचान पत्रों का सत्यापन किया गया है? क्या इनके आने-जाने और ठहरने का कोई रिकॉर्ड रखा जाता है? और सबसे अहम बात, जरूरतमंद जायरीन को ठहरने की जगह उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है?
यदि रेन बसेरा कुछ लोगों के स्थायी ठिकाने में तब्दील हो गया है और जरूरतमंद जायरीन को वहां जगह नहीं मिल पा रही है, तो यह व्यवस्था के उद्देश्य और उसके वास्तविक संचालन के बीच गंभीर अंतर को दर्शाता है।
ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की जिम्मेदारी क्या है?
रेन बसेरे की निगरानी के लिए दरगाह प्रशासन और दरगाह कार्यालय के कर्मचारियों के साथ आईआरडी जवानों की तैनाती किए जाने की बात भी सामने आती रही है। इसके बावजूद यदि सुरक्षा और अनुशासन से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं, तो यह जानना जरूरी है कि तैनात कर्मचारियों की ड्यूटी का वास्तविक स्वरूप क्या है और उसकी निगरानी कौन करता है।
क्या ड्यूटी रजिस्टर की नियमित जांच होती है? क्या सुपरवाइजर मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते हैं? क्या किसी भी घटना के बाद जिम्मेदारी तय की जाती है? इन सवालों के जवाब दरगाह प्रशासन को सार्वजनिक रूप से देने चाहिए।
दरगाह प्रशासन की जवाबदेही तय हो
दरगाह कार्यालय में कर्मचारियों और सुपरवाइजरों की व्यवस्था का उद्देश्य केवल औपचारिक ड्यूटी निभाना नहीं, बल्कि जायरीन को सुरक्षित और व्यवस्थित सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है। ऐसे में रेन बसेरे की बदहाल व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।
यदि निगरानी के लिए पर्याप्त कर्मचारी और सुरक्षा व्यवस्था मौजूद हैं, तो फिर रेन बसेरे के संचालन में कथित अव्यवस्थाएं क्यों बनी हुई हैं? क्या अधिकारियों को जमीनी हालात की जानकारी नहीं है, या फिर शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है? इन बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जायरीन की सुरक्षा सर्वोपरि, व्यवस्था में सुधार की जरूरत
रेन बसेरे को व्यवस्थित करने के लिए जरूरी है कि वहां ठहरने वाले प्रत्येक व्यक्ति का पहचान सत्यापन हो, ठहरने की अवधि निर्धारित की जाए, प्रवेश और निकास का रिकॉर्ड रखा जाए तथा नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल पुलिस को दी जाए और किसी भी आपराधिक मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
दरगाह प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि रेन बसेरा किसी व्यक्ति या समूह के अनिश्चितकालीन कब्जे का माध्यम न बने और दूर-दराज से आने वाले जरूरतमंद जायरीन को प्राथमिकता के आधार पर ठहरने की सुविधा मिले।
अब बड़ा सवाल यह है कि जायरीन की सहूलियत के लिए बनाए गए रेन बसेरे की व्यवस्था आखिर कब सुधरेगी? क्या दरगाह प्रशासन इस मामले में ठोस कदम उठाकर अपनी जिम्मेदारी निभाएगा, या फिर जायरीन की सुरक्षा और सुविधा से जुड़े सवाल यूं ही उठते रहेंगे?
नई दस्तक इस मामले में दरगाह प्रशासन का पक्ष और उठाए गए कदम जानने का प्रयास करेगा, ताकि तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सके।
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