इबादत और दुआओं की रात: अकीदत के साथ मनाई जा रही है 27 रजब की मुकद्दस रात
Haridwar: इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, 27 रजब को 'शब-ए-मेराज' कहा जाता है, जबकि 'शब-ए-क़दर' (लैलतुल क़दर) आमतौर पर रमजान के आखिरी अशरे (अंतिम 10 दिनों) की विषम रातों में तलाशी जाती है।
इबादत और दुआओं की रात: अकीदत के साथ मनाई जा रही है 27 रजब की मुकद्दस रात
मुस्लिम समुदाय के लिए आज की रात बेहद खास और बरकतों वाली है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, रजब महीने की 27वीं तारीख को शब-ए-मेराज के रूप में मनाया जा रहा है। अकीदतमंदों के लिए यह रात अल्लाह की इबादत, तौबा और दुआओं के लिए समर्पित है।
मस्जिदों और घरों में इबादत का दौर
सूर्यास्त के साथ ही शहर की तमाम छोटी-बड़ी मस्जिदों में रौनक बढ़ गई है। उलेमाओं के मुताबिक, इसी मुकद्दस रात को पैगंबर मोहम्मद (स.अ.व.) ने मेराज का सफर तय किया था और मानवता को 'नमाज' का तोहफा मिला था।
विशेष नमाज: लोग मस्जिदों और घरों में नफिल नमाज पढ़ रहे हैं।
कुरान ख्वानी: कई जगहों पर सामूहिक रूप से कुरान का पाठ किया जा रहा है।
दुआओं का दौर: मुल्क में अमन-चैन और इंसानियत की सलामती के लिए विशेष दुआएं मांगी जा रही हैं।
शब-ए-क़दर और 27 रजब का महत्व
यद्यपि लैलतुल क़दर (शब-ए-क़दर) को रमजान के पाक महीने में तलाश किया जाता है, लेकिन रजब की इस 27वीं रात को भी 'अल्लाह की रहमतों का द्वार' माना जाता है। बुजुर्गों का कहना है कि यह रात रूहानी पाकीजगी और अपने गुनाहों से तौबा करने का एक सुनहरा अवसर है।
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