9 मुहर्रम: कर्बला में गहराया पानी का संकट, यज़ीदी सेना ने बढ़ाई इमाम हुसैन के खेमे की घेराबंदी
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9 मुहर्रम: कर्बला में गहराया पानी का संकट, यज़ीदी सेना ने बढ़ाई इमाम हुसैन के खेमे की घेराबंदी
कर्बला (इराक़): इस्लामी इतिहास के सबसे दर्दनाक और ऐतिहासिक अध्याय 'वाक़या-ए-कर्बला' में 9 मुहर्रम (जिसे 'तासूआ' भी कहा जाता है) का दिन बेहद संवेदनशील और हृदयविदारक मोड़ पर पहुंच गया है। यज़ीदी फ़ौज के कमांडर उमर इब्ने साद को कूफ़ा के गवर्नर इब्ने ज़ियाद से मिले कड़े आदेश के बाद, इमाम हुसैन और उनके कुनबे (परिवार) पर दबाव चरम पर पहुंच चुका है।
पानी पर सख्त पहरा, प्यास से तड़पते बच्चे
कर्बला के तपते रेगिस्तान में इमाम हुसैन के खेमे (शिविर) में पानी की एक-एक बूंद के लिए हाहाकार मचा हुआ है। 7 मुहर्रम से ही फ़ुरात नदी के घाटों पर यज़ीदी सैनिकों का कड़ा पहरा है। 9 मुहर्रम आते-आते छोटे बच्चों, महिलाओं और बीमारों की हालत प्यास के कारण बदतर हो चुकी है। यज़ीदी कमांडर ने पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद रखने का सख्त हुक्म दिया है ताकि प्यास के दबाव में इमाम हुसैन, यज़ीद की बैअत (अधीनता) स्वीकार कर लें।
शाम-ए-तासूआ: हमले की तैयारी और मोहलत
9 मुहर्रम की ढलती शाम (जिसे शाम-ए-तासूआ कहा जाता है) को यज़ीदी सेना ने अचानक इमाम हुसैन के खेमे की तरफ बढ़ने और हमला करने की हलचल शुरू कर दी। इस नाज़ुक मोड़ पर इमाम हुसैन ने अपने भाई हज़रत अब्बास (अलमदार) को यज़ीदी सेना के पास भेजा।
इमाम हुसैन ने हज़रत अब्बास से कहा:
"उन्हें समझाओ कि वे आज की रात (10 मुहर्रम की रात) हमें मोहलत दें, ताकि हम अपने परवरदिगार (ईश्वर) की इबादत, नमाज़ और दुआओं में यह आख़िरी रात गुज़ार सकें। अल्लाह जानता है कि मुझे उसकी नमाज़ और तिलावते-क़ुरआन से कितनी मोहब्बत है।"
हज़रत अब्बास के समझाने और बातचीत के बाद, यज़ीदी सेना रात भर के लिए युद्ध टालने और अगली सुबह (10 मुहर्रम) तक की मोहलत देने पर राज़ी हो गई।
रात का अंधेरा और साथियों की वफ़ादारी
9 मुहर्रम की रात को इमाम हुसैन ने अपने खेमे के सभी चिराग़ बुझा दिए। उन्होंने अपने परिवार और वफ़ादार साथियों को इकट्ठा किया और कहा:
- "यज़ीद की सेना को सिर्फ मेरी जान चाहिए। तुम सब रात के अंधेरे का फ़ायदा उठाकर यहाँ से सुरक्षित निकल जाओ। मैं तुम सभी को इस बैअत और ज़िम्मेदारी से आज़ाद करता हूँ।"
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लेकिन इतिहास गवाह है कि चिराग़ दोबारा जलने पर एक भी साथी अपनी जगह से नहीं हटा। इमाम हुसैन के भाई, बेटे, भान्जे और निष्ठावान साथियों (अंसार) ने एक स्वर में कहा कि वे इमाम पर अपनी जान न्योछावर कर देंगे, लेकिन उन्हें अकेला छोड़कर कभी नहीं जाएंगे।
कल होगा हक और बातिल का अंतिम फ़ैसला
9 मुहर्रम की यह रात कर्बला में इबादत, आंसुओं और संकल्प की रात है। एक तरफ यज़ीद की हज़ारों की क्रूर सेना है, तो दूसरी तरफ इमाम हुसैन के सिर्फ 72 जांबाज और भूखे-प्यासे साथी हैं। कल यानी 10 मुहर्रम (आशूरा) को इतिहास का वह सबसे बड़ा महासंग्राम होने जा रहा है, जो सदियों तक दुनिया को ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की प्रेरणा देता रहेगा।
- ब्यूरो रिपोर्ट, नई दस्तक पोर्टल
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