दिल का दर्द आंखों में छलक आया, बिछड़े बच्चों से मिलते ही खुशी में बदल गया ग़म...

Jan 17, 2026 - 14:28
Jan 17, 2026 - 16:35
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दिल का दर्द आंखों में छलक आया, बिछड़े बच्चों से मिलते ही खुशी में बदल गया ग़म...

दिल का दर्द आंखों में छलक आया, बिछड़े बच्चों से मिलते ही खुशी में बदल गया ग़म...


हरिद्वार! परिजनों की आंखों से छलकते खुशी के आंसू और बच्चों को सीने से लगाते भावुक क्षण… यह दृश्य हरिद्वार पुलिस की उस मानवीय पहल का गवाह बना, जिसमें जम्मू-कश्मीर से भटककर हरिद्वार पहुंचे दो नाबालिग बच्चों को सकुशल उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया। बच्चों से बिछड़ने का दर्द, मिलने की खुशी में बदल गया और इस पूरे कारनामे के पीछे हरिद्वार पुलिस की सतर्कता, संवेदनशीलता और अथक प्रयास रहे।

मुख्यालय स्तर से गुमशुदा बालक-बालिकाओं व महिला-पुरुषों की तलाश और पुनर्वास के लिए प्रदेशभर में चलाए जा रहे “ऑपरेशन स्माइल” अभियान के तहत एसएसपी हरिद्वार के निर्देश पर गठित A.H.T.U. (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट) टीम ने शुक्रवार को हरकी पैड़ी क्षेत्र से दो बच्चों को रेस्क्यू किया। सर्द मौसम में ठंड से ठिठुरते मिले 11 और 8 वर्षीय इन दोनों बच्चों की हालत अत्यंत दयनीय थी।

पूछताछ में बच्चों ने बताया कि वे जम्मू-कश्मीर के निवासी हैं और गुरुवार शाम अपने हॉस्टल वेद मंदिर, जम्मू से पढ़ाई के दबाव के चलते भागकर रेल के माध्यम से हरिद्वार पहुंच गए थे। पुलिस ने तत्काल संवेदनशीलता दिखाते हुए दोनों बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कर आवश्यक विधिक प्रक्रिया शुरू की। रेस्क्यू के बाद बच्चों को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए ले जाया गया। स्वास्थ्य जांच उपरांत उन्हें बाल कल्याण समिति, हरिद्वार के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां आवश्यक काउंसलिंग के बाद खुला आश्रय गृह, कनखल में संरक्षण दिलवाया गया।

इसके साथ ही हरिद्वार पुलिस ने विभिन्न माध्यमों से लगातार प्रयास करते हुए बच्चों के परिजनों से संपर्क साधा और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। सूचना मिलते ही परिजन शनिवार को पुलिस कार्यालय रोशनाबाद, हरिद्वार पहुंचे, जहां एसएसपी क्राइम/ट्रैफिक जितेंद्र मेहरा एवं एसपी/क्षेत्राधिकारी सदर निशा यादव की मौजूदगी में दोनों बच्चों को सकुशल उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया।


अपने बच्चों को सामने पाकर परिजन भावुक हो उठे और उन्हें गले लगाकर हरिद्वार पुलिस का आभार जताया। यह कार्रवाई न केवल पुलिस की सतर्कता का उदाहरण बनी, बल्कि यह भी साबित कर गई कि हरिद्वार पुलिस कानून के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी पूरी जिम्मेदारी से निभा रही है।

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