पिरान कलियर में नए वक्फबोर्ड सीईओ का पहला फरमान: दरगाह बाद में, होटल-ढाबे पहले.!
पिरान कलियर में नए वक्फबोर्ड सीईओ का पहला फरमान: दरगाह बाद में, होटल-ढाबे पहले.!
पिरान कलियर: पिरान कलियर दरगाह में नए साहब की एंट्री हुई और लोगों को लगा अब शायद दरगाह में हालात बदलेंगे। करोड़ों की आमदनी, सालों से जमे बकायेदार, ठेकों की मलाई और बदइंतजामी—सब पर पहली ही बैठक में चोट होगी। लेकिन साहब ने ऐसा चश्मा लगाया कि दरगाह नहीं, सीधे होटल-ढाबे और मेडिकल स्टोर ही नजर आए।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के नवनियुक्त सीईओ शनिवार को दरगाह पहुंचे, कर्मचारियों को औपचारिक हिदायतें दीं और फिर जो प्रेस-नोट निकला, उसने इलाके में चाय से ज्यादा चटखारे पैदा कर दिए। प्रेस-नोट में दरगाह की अव्यवस्था पर एक शब्द नहीं, लेकिन होटल की दाल में नमक ज्यादा है या कम—इसकी पूरी चिंता झलक गई। खाने की गुणवत्ता खराब है, मिलावट हो रही है, मेडिकल स्टोर प्रतिबंधित दवाइयां बेच रहे हैं और अगर हफ्ते भर में सुधार नहीं हुआ तो साहब खुद निरीक्षण करेंगे।
अब सवाल यह है कि हुजूर, आपकी कुर्सी वक्फ बोर्ड की है या खाद्य एवं औषधि विभाग की? दरगाह की फाइलें धूल खा रही हैं, लेकिन होटल का मेन्यू तुरंत जांच के लायक हो गया। जिन बकायेदारों ने सालों से वक्फ की रकम दबा रखी है, उन पर खामोशी है, लेकिन ढाबे वाले की रोटी पर पूरी नजर।
पिरान कलियर, जो प्रदेश की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली दरगाह मानी जाती है, वहां करोड़ों के हिसाब-किताब पर सन्नाटा और खाने की थाली पर सख्ती—यही नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। इलाके में लोग मुस्कुरा कर कह रहे हैं, “दरगाह की तिजोरी खोलना मुश्किल काम है, होटल की प्लेट देखना ज्यादा आसान।”
अब देखना यह है कि आगे साहब की नजरें दरगाह के असली दर्द तक पहुंचती हैं या फिर उनका निरीक्षण होटल-ढाबों की दहलीज से आगे नहीं बढ़ पाता। फिलहाल पहला प्रेस-नोट सुधार से ज्यादा व्यंग्य का स्वाद छोड़ गया है।
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