क्या है कुंडों की नियाज़ किस इमाम की याद में 22 रजब से नियाज़ का यह सिलसिला शुरू होता है

Jan 13, 2026 - 04:56
Jan 13, 2026 - 05:07
 0
क्या है कुंडों की नियाज़ किस इमाम की याद में 22 रजब से नियाज़ का यह सिलसिला शुरू होता है

22 रजब को होने वाली हज़रत इमाम जाफ़र सादिक (अ़लैहिस्सलाम) की नियाज़, जिसे आम भाषा में "कुण्डों की नियाज़" कहा जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश) के मुसलमानों में एक बहुत ही प्रचलित और श्रद्धापूर्ण परंपरा है।

​यहाँ इस विषय से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां दी गई हैं:

​1. इतिहास और पृष्ठभूमि

​यह नियाज़ इस्लाम के छठे इमाम, हज़रत इमाम जाफ़र सादिक (रज़ियल्लाहु अ़न्हु) की याद में की जाती है। मान्यता है कि इस दिन मन्नतें पूरी होती हैं और अल्लाह की बारगाह में इमाम के वसीले से दुआ मांगी जाती है।

​2. इसे "कुण्डे" क्यों कहते हैं?

​इस नियाज़ की सबसे खास बात यह है कि इसमें मिट्टी के नए कुण्डों (मिट्टी के प्याले या बर्तन) का इस्तेमाल किया जाता है। इन कुण्डों में मीठी पूरियां और खीर या हलवा रखा जाता है। इसी कारण इसे "कुण्डों की नियाज़" कहा जाता है।

​3. नियाज़ का तरीका

​साफ़-सफ़ाई: इस दिन घर में विशेष साफ़-सफ़ाई की जाती है

​पकवान: मुख्य रूप से मैदे की मीठी पूरियां और दूध की खीर बनाई जाती है।

​तबर्रुक: फ़ातिहा के बाद इस प्रसाद (तबर्रुक) को परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों में बांटा जाता है।

​4. अहमियत और संदेश

​इस परंपरा का मुख्य उद्देश्य ईसाल-ए-सवाब (पुण्य पहुँचाना) और गरीबों को खाना खिलाना है। यह लोगों को आपस में जोड़ने और इमाम की शिक्षाओं, जैसे कि धैर्य, ज्ञान और उदारता को याद करने का एक ज़रिया है।

What's Your Reaction?

Like Like 8
Dislike Dislike 1
Love Love 1
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0